शिमला, सिरमौर और सोलन जीतना भाजपा के लिए चुनौती

शिमला, 03 सितम्बर ।

आगामी विधानसभा चुनावों के लिए प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय निर्वाचन आयोग इस माह कभी भी चुनावों का ऐलान कर सकता है। चुनावों के मददेनजर सभी दल सियासी रणनीतियां बनाने में जुटे हैं। भाजपा और कांग्रेस द्वारा चुनाव मैदान में उतारे जाने वाले प्रत्याशियों पर सब की नजरें टिकी हैं। दोनों दल सिंतबर मध्य तक अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर देंगे। चुनावी रणभेरी में भाग्य आजमाने उतरे कई क्षेत्रीय दल भी इन दो मुख्य पार्टियों द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा के बाद अपने उम्मीदवारों का ऐलान करेंगे।
हिमाचल का चुनावी इतिहास भाजपा और कांग्रेस के इर्दगिर्द ही घुमता है। इन चुनावों में क्षेत्रीय दलों का जीत दर्ज करना किसी करिश्मे से कम नहीं होगा। सतारूढ़ भाजपा पार्टी पर पंजाब की तर्ज पर सता बरकरार रखने का दबाव होगा, वहीं कांग्रेस पार्टी की बागडोर संभाले पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। ऐसे में जब कांग्रेस में अंत:कलह की चिंगारी भी पार्टी के लिए खतरे से कम नहीं है। हालांकि राजनीतिक विश£ेषक वीरभद्र को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान सौंपने से पार्टी को फायदा ज्यादा आंक रहे हैं। वीरभद्र सिंह की राज्य के हर विस क्षेत्र में जमीनी पकड़ है और खासकर ऊपरी जिलों में उनकी मौजूदगी भाजपा के लिए खतरे की घंटी बन सकती है।

पिछले विस चुनावों में भाजपा ने तीन जिलों शिमला, सोलन और सिरमौर से अप्रत्याशित जीत दर्ज की थी। इन जिलों में कांगे्रस की शिकस्त ने भाजपा के लिए सता का दरबाजा खोला था। शिमला, सोलन और सिरमौर में कुल 18 विधानसभा सीटें हैं और गत चुनावों में भाजपा की झोली में 12 सीटें गई हैं। सोलन में भाजपा ने 5 सीटों पर क्लीन स्वीप किया था और सिरमौर की 5 सीटों में से 4 पर काबिज हुई। शिमला जिले के रोहडू उपचुनाव में भी भाजपा जीती, ठियोग से भाजपा समर्थित विधायक राकेश वर्मा हैं, जिन्हें इस बार पार्टी से टिकट मिलने की उम्मीद है।

पूर्व में कांग्रेस के गढ़ कहे जाने वाले इन तीन जिलों से भाजपा की जीत ने कांग्रेस को सकते में डाल दिया था। लिहाजा इस बार वीरभद्र का चुनावी कमान संभालना कांग्रेस के लिए राहत भरा है। वीरभद्र का शिमला से नाता और उनकी मुख्यमंत्री की दौड़ को कांग्रेसी पड़ोसी जिलों सोलन और सिरमौर में पासा पलटने की कड़ी में देख रहे हैं। सोलन व सिरमौर में उपचुनावों में भी पलड़ा बराबरी पर छुटा है। सिरमौर से एक सीट भाजपा की झोली जबकि सोलन से कांग्रेस के खाते में गई। भाजपा के मंत्री रह चुके राजीव बिंदल का चुनावी क्षेत्र सोलन आरक्षित हो चुका है। बहरहाल इस मर्तबा तीन जिलों में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है।

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