चुनाव बहाली की मांग पर छात्र संगठन लामबंद

शिमला, 11 अगस्त ।

प्रदेश विवि और कॉलेजों में चुनावों को लेकर छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। तीनों प्रमुख छात्र संगठनों एबीवीपी, एसएफआई और एनएसयूआई ने इकटठे होकर एकमंच से लड़ाई लडऩे का ऐलान किया है। छात्र राजनीति में एक-दूसरे के घुरविरोधी रहे तीनों संगठन अब मिलकर चुनावी लड़ाई लड़ेंगे। शनिवार को प्रदेश विवि में छात्र संगठनों ने एक संयूक्त समन्वय समिति का गठन किया। इस समिति में छह सदस्य बनाए गए हैं। इनमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से प्रांत महामंत्री नवीन शर्मा और अजय भेरटा, एसएफआई से राज्य अध्यक्ष कपिल भारद्वाज और सचिव विक्रम सिंह, एनएसयूआई से राज्य अध्यक्ष यदूपति ठाकुर और विवि कैंपस अध्यक्ष अजय चौहान शामिल किए गए हैं। सभी सदस्य आज बैठक कर अगली कार्ययोजना निर्धारित करेंगे।

एसएफआई के प्रदेश अध्यक्ष कपिल भारद्वाज ने कहा कि छात्र संगठन चुनावों को लेकर एकजुट होकर निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।  रविवार को समिति की एक बैठक होगी, जिसमें आगामी रणनीति की रूपरेखा तय की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश की छात्र सियासत में पहली बार ऐसा हुआ है कि तीनों छात्र संगठनों ने एकमंच बनाकर किसी मसले पर संघर्ष किया हो। इससे पहले वर्ष 1988 में भी चुनाव बहाली की मांग पर एसएफआई और एबीवीपी ने एकजुट होकर संघर्ष किया था। इसके बाद छात्र चुनाव बहाल कराए गए थे। प्रदेश में छात्र चुनावों पर दो बार प्रतिबंध लग चुका है। हिंसा के कारण 1986 और 1994 में चुनावों पर रोक लगी थी।
गौरतलब है कि विवि प्रशासन और प्रदेश सरकार ने इस दफा छात्र चुनावों पर प्रतिबंध लगाने के संकेत दिए हैं। विवि के कुलपति ने चुनावों पर रोक लगाने के पीछे छात्र हिंसा को मुख्य वजह बताया है। कुलपति एडीएन वाजपेयी का कहना है कि चुनावों से कैंपसों में माहौल बिगड़ता है और छात्रों के बीच हिंसा की घटनाएं बढ़ती हैं। कुलपति के बयान से आक्रोशित तीनों छात्र संगठनों ने चुनावी प्रतिबंध को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए आदंोलन के लिए चेताया है।

 

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