किस राज्य में सबसे ज्यादा मोबाइल, ट्राई की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

देश में हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा मोबाइल का इस्तेमाल होता है। यहां का शहरी औसतन चार मोबाइल सेवाओं का प्रयोग करता है। यह ताजा खुलासा ट्राई की रिपोर्ट से हुआ है। इतना ही नहीं यहां के गांव भी फोन घनत्व के मामले में देश में अव्वल नबंर पर हैं।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश ने फोन घनत्व के मामले में गुजरात, पंजाब, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे आर्थिक संपन्न राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। हिमाचल के गांव में फोन 75 फीसदी है।
यानी गांवों की आबादी के तीन चौथाई लोगों के पास मोबाइल या टेलीफोन सेवाएं है, जबकि शहरों में तो यह आंकड़ा 460 फीसदी से ज्यादा बैठता है। सेल्युलर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार हिमाचल प्रदेश में मोबाइल कनेक्शन की संख्या 70 लाख को पार कर चुकी है। प्रदेश की कुल आबादी 68 लाख है।

भाजपा सांसद राजन सुशांत को पार्टी व संसदीय पार्टी दोनों से ही बाहर कर दिया

लंबी अटकलों व चर्चाओं के बाद आखिर कांगड़ा से भाजपा सांसद राजन सुशांत को पार्टी व संसदीय पार्टी दोनों से ही बाहर कर दिया गया है। तकनीकी तौर पर इसे निलंबित करना बताया गया है। रविवार को हुई संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद राजन सुशांत को जो पत्र भेजा गया है, उसमें कहा गया है कि राजन सुशांत लगातार अनुशासनहीनता कर रहे थे। पार्टी विरोधी गतिविधियों के भी उन पर संगीन आरोप थे। चेतावनी दिए जाने के बावजूद वह अपनी बयानबाजी पर अंकुश नहीं लगा सके। लिहाजा उन्हें संसदीय पार्टी व मुख्य पार्टी की सदस्यता से निलंबित किया जाता है। राजन सुशांत पिछले आठ महीने से न केवल प्रदेश सरकार, बल्कि पार्टी के लिए भी दिक्कतें खड़ी कर रहे थे। खीमीराम जब प्रदेश अध्यक्ष थे तो उन्होंने भी हाइकमान से मिलकर राजन सुशांत के बयानों का असर पार्टी के ऊपर पड़ने से हो रहे नुकसान का हवाला देकर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। यही नहीं, हाइकमान ने फिर राजन सुशांत के मसले पर ढील दी, मगर इसी के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री प्रो. धूमल के खिलाफ भी परोक्ष तरीके से बयान दे डाले। यहां तक कि शिमला में हुए एक आयोजन के दौरान उन्होंने कांग्रेस के युवा संगठन के अध्यक्ष तक को निमंत्रण देकर पार्टी में नई बहस छेड़ दी। इसके बाद पार्टी हाइकमान की तरफ से उन्हें फिर चेतावनी दी गई। कुछ समय के लिए राजन सुशांत शांत रहे, मगर फिर इसके बाद उन्होंने अपने तेवर तीखे कर लिए और भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाकर प्रदेश सरकार की इस मुहिम पर भी सवाल उठा दिए। जब से हिमाचल लोकहित पार्टी में उनके पुत्र धैर्य सुशांत को शामिल करने के बाद युवा संगठन का नेतृत्व सौंपा गया था, तभी से ये चर्चाएं तेज हो गई थीं कि राजन सुशांत का अब जाना लगभग तय है और हुआ भी य

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