42 वर्ष का हुआ चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय

इन 42 सालों में चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय ने कई क्षेत्रों में आयाम स्थापित किए हैं

राजेश व्यास। पालमपुर

हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना एक नवम्बर, 1978 को हुई थी जिसका नाम जून, 2001 में पुनः नामकरण के बाद चौधरी सरवण कुमार, हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय रखा गया। मई 1966 में स्थापित कृषि महाविद्यालय,पालमपुर नव-स्थापित कृषि विश्वविद्यालय का केन्द्र बिन्दु बना। कृषि, बागवानी, वानिकी, तथा अन्य सम्बन्धित विषयों में शिक्षा अनुसंधान व प्रदेश के ग्रामीण लोगों के उत्थान के लिए उन विषयों का प्रसार करना जिन्हें विश्वविद्यालय समय-समय पर उचित समझे, इत्यादि दायित्व विश्वविद्यालय को सौंपे हैं। इन 42 वर्षों में इस विश्वविद्यालय ने हिमाचल प्रदेश के कृषि परिदृश्य को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज, राज्य ने कृषि विविधिकरण में नाम कमाया है तथा विश्वविद्यालय ने कृषक समुदाय में अपना विश्वास कायम किया है।
अकादमिक कार्यक्रमः
कृषि तथा अन्य सम्बन्धित विषयों में शिक्षा हेतु इस समय विश्वविद्यालय में चार महाविद्यालय कार्यरत्त हंै। कृषि महाविद्यालय में 13, डाक्टर जी-सी- नेगी पशु-चिकित्सा व पशु विज्ञान महाविद्यालय में 18,गृह विज्ञान महाविद्यालय में 5 और आधारभूत विज्ञान महाविद्यालय मंे 4 विभाग हैं। इन महाविद्यालयों में 6 स्नातक, 23 मास्टर्ज व 15 पी-,च-डी- कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। इस समय 8417 विद्यार्थी विश्वविद्यालय में शि{ाा ग्रहण कर रहे हैं जिनमें 943 लड़कियां और 700 लड़के शामिल हैं।
अनुसंधान गतिविधियांः

विश्वविद्यालय का अनुसंधान निदेशालय कृषि, पशुचिकित्सा व पशु विज्ञान, गृह विज्ञान व आधारभूत विज्ञान संकाय के विभिन्न अनुसंधान कार्यक्रमों को समन्वित करता है। विश्वविद्यालय के तीन अनुसंधान केन्द्र बजौरा, धौलाकुंआ और कुकुमसेरी में कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त शिमला व सोलन जिलों को छोड़कर प्रदेश भर में 10 उप-अनुसंधान केन्द्र कांगड़ा, मलां, नगरोटा, अकरोट, बरठीं, सुन्दरनगर, सलूणी, संागला, लियो व लरी में स्थित हैं। विश्वविद्यालय ने राज्य विशेष की आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न फसलों के लि, लगभग 155 कृषि तकनीकें भी विकसित की हैं। प्रतिवर्ष खाद्यान्न, दलहन, तिलहन, सब्जियों तथा चारा इत्यादि विभिन्न फसलों का 800 क्ंिवटल ब्रीडर बीज तथा 1000 क्ंिवटल आधार बीज उत्पादित करके राज्य कृषि विभाग को बढ़ाने के लिए दिया जाता है ताकि किसानों को प्रतिवर्ष अच्छे बीज उपलब्ध हो सकंे। विश्वविद्यालय ने किसानों के लि, लगभग 100 कृषि तकनीकों की अनुशंसा,ं भी जारी की हैं।

विश्वविद्यालय ने फसल व पशुधन उत्पादन में बढ़ौतरी के लि, फसल सुधार, पशु प्रजनन, बिमारियों से लड़ने, प्राकृतिक स्रोत प्रबन्धन इत्यादि के लिए सही तकनीकें विकसित की हैं। इसके अतिरिक्त जैविक खेती पर चल रहे शोध के साथ-साथ विश्वविद्यालय ने 22-66 करोड़ रू- की प्राकृतिक खेती की परियोजना पर कार्य शुरू किया है। विश्वविद्यालय ने कृषि आधारित बीस माॅडल प्रदेश सरकार के कृषि विभाग व पशुपालन विभाग के साथ सांझा किए हैं ताकि इन विभागों के तालमेल से किसानों की आय दोगुणा करने पर कार्य किया जा सके।
प्रसार शिक्षा
विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय पर विभिन्न प्रसार कार्यक्रमों की योजना, कार्यान्वयन व समन्वय गतिविधियों जिम्मेवारी है। यह निदेशालय सभी महाविद्यालयों, अनुसन्धान केन्द्रों, कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन इत्यादि विभिन्न विभागों व दूसरी प्रसार एजैंसियों के तालमेल से कार्य संचालित करता है। यह किसानों, पशुपालकों, कृषक महिलाओं तथा ग्रामी.ण युवाओं के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशि{ा.ा कार्यक्रमों का संचालन करता है। प्रसार सेवाओं हेतु विश्वविद्यालय के मुख्यालय तथा प्रदेश के आठ जिलों में कृषक-मित्र व लाभकारी तकनीकों और अनुसंधान के प्रसार हेतु कुल्लू, सिरमौर, हमीरपुर, उना, म.डी, कांगड़ा, बिलासपुर तथा लाहौल-स्पिती में कृषि विज्ञान केन्द्र कार्य कर रहे हैं। प्रत्येक कृषि विज्ञान केन्द्र में प्राकृतिक खेती से सम्बन्धित गतिविधियां संचालित की जा रहीं हैं और सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों ने प्राकृतिक खेती हेतु ,कई गांव गोद लिया है।

कृषि विज्ञान केन्द्र धौलाकुंआं, बरठीं तथा म.डी में ‘‘ग्रामीण कृषि मौसम सेवा’’ के अन्तर्गत ‘‘जिला स्तरीय ,Û्रोमैट यूनिट’’ स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की Ûई है। विश्वविद्यालय का कृषि तकनीकी सूचना केन्द्र किसानों को ‘‘सिंगल विन्डो सर्विस’’ प्रदान कर रहा है। विश्वविद्यालय को दिए गए दायित्वों को पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय के मुख्यालय तथा सभी अनुसन्धान व कृषि विज्ञान केन्द्रों में विशाल संरचनात्मक ढांचा सृजित किया गया है। विश्वविद्यालय में किसानों व छात्रों के लिए कृषक आवास, यातायात, छात्रावास, खेल परिसर, रोजगार प्रकोष्ठ इत्यादि उतम व गुणवतापूर्ण सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। विश्वविद्यालय में इस समय 240 शैक्षाणिक तथा 718 गैर-शैक्षणिक कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। वर्तमान कुलपति प्रो- हरीन्द्र कुमार चौधरी का मानना है कि विश्वविद्यालय छात्रों व किसानों को उत्कृष्ट सेवा,ं उपलब्ध करवाएगा और विश्वविद्यालय की सभी योजनाओं के केन्द्र बिन्दु किसान होंगे।