कोविड-19 मरीजों के उपचार में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री बोले, जुखाम जैसे लक्षणों वाले पर्यटकों को प्रदेश में आने की अनुमति नहीं देनी चाहिए

नार्थ गजट न्यूज। शिमला

चिकित्सकों को कोविड-19 मरीजों को उचित और सामयिक उपचार सुनिश्चित करना चाहिए और इसमें किसी भी लापरवाही को गम्भीरता से लिया जाएगा। यह बात मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां प्रदेश के सभी उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्बोधित करते हुए कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सकों और पेरामेडिकल कर्मियों को कोविड-19 मरीजों की चिकित्सा के लिए मानवीय दृष्टिकोण और उचित नैदानिक प्रोटोकाॅल अपनाना चाहिए। अस्पतालों में आॅक्सिजन सिलैण्डर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के अलावा जरूरी दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के आठ चिकित्सा संस्थानों आरटी-पीसीआर सुविधा प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त दो संस्थानों में सीबी-एनएएटी सुविधा और प्रदेश के 25 चिकित्सा संस्थानों में टीआरयू-एनएएटी उपलब्ध करवाई जा रही है।

प्रदेश में कोविड-19 के कारण हो रही मृत्यु की संख्या में हो रही वृद्धि पर मुख्यमंत्री ने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि वरिष्ठ चिकित्सकों और विशेषज्ञों को ऐसे मरीजों के उपचार में विशेष ध्यान देना चाहिए और उन्हें बेहतरीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कोविड के कारण हो रही मृत्यु दर प्रति सौ मरीजों में 0.46 प्रतिशत है, जो कि राष्ट्रीय दर 100 में 1.8 प्रतिशत लोगों की मृत्यु से काफी कम है।

जय राम ठाकुर ने कहा कि लक्षणरहित मरीजों के लिए होम आईसोलेशन सुविधा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, क्योंकि इससे न केवल कोविड-19 समर्पित अस्पतालों का कार्यभार कम होगा बल्कि उन्हें घर का वातावरण भी उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि आशा और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को ऐसे रोगियों की स्वास्थ्य जाॅंच के लिए उनके घरों पर प्रतिदिन जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्वारंटीन संस्थानों को सरकार द्वारा जारी की गई मानक संचालन प्रक्रिया का पालन सख्ती से करना चाहिए ताकि इन केन्द्रों से संक्रमण न फैले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 मरीजों के माईक्रो कन्टेन्मेंट जोन चिन्हित किए जाने चाहिए ताकि इन क्षेत्रों में बेहतर प्रबन्धन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि जुखाम जैसे लक्षणों वाले पर्यटकों को प्रदेश में आने की अनुमति नहीं देनी चाहिए और केवल उन पर्यटकों को प्रदेश में आने की अनुमति दी जाए, जो राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देशों का पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पीपीई किट, आॅक्सिजन सिलैण्डर की कोई भी कमी नहीं है।

जय राम ठाकुर ने कहा कि सीमावर्ती जिलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी बिना मान्य अनुमति के जिलों में प्रवेश न कर सकें और सभी सीमावर्ती क्षेत्रों की विशेष निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयां भी उनके कामगारों की आवाजाही के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें। प्रदेश में आने वाले मजदूरों की चिकित्यीय जाॅंच और क्वारंटीन में रखने के उपरान्त ही उन्हें खेतों और विभिन्न परियोजनाओं में कार्य करने की अनुमति दी जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस बद्दी को औद्योगिक कामगारों की आवाजाही पर सख्त निगरानी रखने के लिए गृह रक्षक जवानों की अतिरिक्त टुकड़ी प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कोरोना योद्धाओं जैसे चिकित्सक, पैरा मैडिकल कर्मचारी, पुलिस जवान, स्वच्छता कार्मचारी को इस संक्रमण से बचाने के लिए भी कदम उठाने जाएंगे।

स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. राजीव सैजल ने कहा कि क्वारंटीन केन्द्रों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर विशेष बल दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने कोविड केयर केन्द्रों और कोविड अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए सभी पर्याप्त प्रबन्ध सुनिश्चित किए है।

मुख्य सचिव अनिल खाची ने अधिकारियों को प्रदेश सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए गए दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लक्षणरहित मरीजों को लेकरे अधिक सावधानी बरती जाए।

अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा आर.डी. धीमान, पुलिस महानिदेशक संजय कुण्डू, प्रधान सचिव राजस्व ओंकार शर्मा, विशेष सचिव डी.सी. राणा व अन्य अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।