कोरोना संकट ने खोली गरीबी मिटने वाले दावों की पोल : शांता कुमार

शांता बोले अब सख्ती के साथ लागू करना होगा – हम दो हमारे दो और अब सबके दो 

राजेश व्यास। पालमपुर

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं हिमाचल प्रदेशके भूतपूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व सांसद, शांता कुमार ने कहा है कि करोना संकट की आपदा में भारत के विकास से सम्बन्धित एक कठोर और कड़वी सच्चाई भी सामने आ रही है। सामान्य स्थिति होने के बाद सरकार को प्राथमिकता से उसका समाधान करना होगा। पूरे देश के गरीब प्रदेशो के लाखों मजदूर रोटी रोजी कमाने के लिए घर बार छोड़ कर परिवार के साथ सम्पन्न प्रदेशो में मजदूरी करते है। करोना से परेशान घर जाने के लिए वेताब उनकी स्थिति देख कर पूरे देश की आंखे खुल गई है। औरंगाबाद रेल की पटरी पर 40 किलोमीटटर पैदल चलकर थक्के मजदूर सोने पर मजबूर हुए और मालगाड़ी ने उनको रौंद डाला। पूरे देश में सड़कों पर अपना सामान सिर पर रखे छोटे बच्चों को लेकर निराश हताशऔर बद-हवाश मजदूर सैकड़ों मील पैदल अपने घरों की ओर जाते हुए देख कर दिल दहल जाता है। हिमाचल तक में झारखण्ड के मजदूर छोटे बच्चों को लेकर रोटी रोजी कमाने के लिए आते हैं।
उन्होने कहा है कि इस संकट से पहले बड़ी शान से कहा जाता था कि भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थ व्यवस्था है। दुनिया के पांच अमीर देश में भारत का नाम है। करोड़ों लोग गरीबी की रेखा से ऊपर उठ गये। अब कोरोना संकट ने सारी कलई खोल दी है।
शांता कुमार ने कहा है कि सच्चाई यह है कि 2014 के बाद  नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में विकास और गरीबी दूर करने की ईमानदारी से पूरी कोशिश हुई। बहुत बढ़िया योजनाएं चली। परन्तु योजनाओं को लागू करने वाला नीचे तक का प्रशासन पूरी तरह योग्य व ईमानदार नही। योजनाएं पूरी तरह लागू नही हुई। सफलता के बहुत से आंकड़े फर्जी है।
उन्होने कहा कि इस सबके बाद भी योजनाओं का कुछ लाभ हुआ परन्तु उस लाभ का बड़ा हिस्सा बढ़ती आबादी का राक्षस निगल गया। कड़वी सच्चाई यह है कि विकास हुआ परन्तु उसका अधिक लाभ ऊपर के लोगों को हुआ। नीचे तक पूरा लाभ बहुत कम पहुंचा या नहीं पहुंचा। विकास के साथ-साथ आर्थिक विषमता भी बढ़ती गई। आज विश्व में सबसे अधिक आर्थिक विषमता भारत में है।
उन्होने कहा कि भारत की आबादी 34 करोड़ से बढ़ कर 140 करोड हो गई। प्रतिवर्ष एक करोड़ 60 लाख आबादी बढ़ती है। प्रति वर्ष एक करोड़ नये बेरोजगार खड़े हो जाते है। कोई भी सरकार कितनी भी योजना चलाये इस प्रकार बढ़ती आबादी में गरीबी दूर नहीं हो सकती।
पिछले  वर्ष ग्लोवल हंगर इन्डेक्स की रिपोर्ट में कहा था कि भारत के 17 करोड़ लोग लगभग भूखे पेट रहते हैं। राश्ट्रसंघ की रिपोर्ट के अनुसार विश्व में सबसे अधिक भूखे लोग भारत में रहते है। कुपोषण से मरने वाले बच्चों की सख्ंया सबसे अधिक भारत में है। 70 साल की आजादी के बाद का भारत ऐसा होगा। यह किसी ने सोचा न था।
शांता कुमार ने कहा है कि सामान्य स्थिति होने के बाद सबसे जरूरी पहला काम सरकार को जनसंख्या विस्फोट को रोकना होगा। कानून द्वारा बढ़ती आबादी के राक्षस को नुकेल डालनी होगी। सख्ती के साथ लागू करना होगा – ”हम दो हमारे दो और अब सबके दो।“