शांता कुमार ने बताया कैसे हिमाचल को मिला बिजली परियोजनाओं में हिस्सा

कहा इतना बड़ा निर्णय इस प्रकार मनाना असंभव था

राजेश व्यास। पालमपुर

लाकडाडन के बीच वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इन दिनों अपनी पुरानी यादें सांझा करते जनता के ज्ञान में बढ़ावा तो कर ही रहे हैं लेकिन इसके साथ ही खूब मनोरंजन भी कर रहे हैं। शांता कुमार जी ने कल अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा है कि…
( सौजन्य शांता कुमार जी के सोशल मीडिया अकाउंट से )

आशा ही नहीं मुझे विश्वास है कि आप सब मित्र योग, प्राणायाम और ध्यान अवश्य कर रहे होंगे। हमने कहीं जाना नहीं, किसी ने मिलने आना नही। ऐसा यह समय फिर कभी मिलेगा नहीं। भगवान करे दोबारा ऐसा समय न आये। जो मित्र अभी भी नहीं कर रहे उनसे मेरा विशेष आग्रह है तुरन्त प्रारम्भ करिये। योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का सबसे आवष्यक हिस्सा बनायें।

कल-परसों जो चित्र आपने देखा वह हिमाचल भारतीय जनता पार्टी द्वारा ऐतिहासिक अधिकार यात्रा का चित्र है। 1977 में मुख्यमंत्री बना । सीधा जेल से आया था, युवा था। प्रदेश में बहुत कुछ अतिशीघ्र कर लेने का जुनून था। साधन कम थे। साधन जुटाने के लिए ही रायॅल्टी लेने की बात सोची थी। उसी प्रकार एक विषय ध्यान में आया। 1966 में लोक सभा द्वारा पंजाब पुर्नगठन कानून बनाया गया। पंजाब का बटवारा हुआ। हम कांगड़ा-वासी पंजाब से कट कर हिमाचल का भाग बने। उस कानून के द्वारा हिमाचल प्रदेश को सांझे पंजाब की सम्पत्ति में से जो हिस्सा मिलना चाहिए था वह मिला नहीं था। मैंने इस संबंध में अधिकारियों के साथ बैठकर पूरी जानकारी प्राप्त की।

प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई बहुत आदर्शवादी सिद्धान्तों के अनुसार चलने वाले नेता थे। बहुत कम बात करते थे। नया-नया मुख्यमंत्री बना था। उनसे मिलने में संकोच भी होता था। समय लिया और इस संबंध में विस्तार से अपनी बात कही। सुनकर हैरान हुए और प्रभावित हुए। मैंने कहा छोटा सा हिमाचल 11 वर्ष हो गये जो लोक सभा ने हमें दिया वह आज तक मिला नही। मैंने कहा मुझे आशा है कि वे हिमाचल को न्याय दिलायेगे। कुछ दिन के बाद उन्होने सम्बन्धित तीनों मुख्यमन्त्रियों की बैठक बुला ली। मैंने विस्तार से अपनी बात कही। हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री देवी लाल जी और पंजाब के मुख्यमंत्री श्री प्रकाश सिंह बादल मेरे तर्क का कोई उत्तर नहीं दे सके। अधिकारी बुलाये गये और यह तय हुआ कि श्री सुब्रामण्यम की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाए। बैठक समाप्त होने लगी। एकदम एक बात ध्यान में आई। मैंने कहा प्रधानमंत्री जी 11 वर्ष हो गये। हमें न्याय नहीं मिला। कमेटी बनेगी। कब रिपोर्ट देगी पता नही यह अन्याय कब तक चलता रहेगा। प्रधानमंत्री जी ने मुझे पूछा आप और क्या चाहते हो? मैंने कहा जब सिद्धांत रूप में इन्हें हमारी बात स्वीकार है तो कम से कम बिजली का हिस्सा अस्थाई रूप में दिला दीजिए। बात करते-करते सब खड़े हो गये। श्री देवी लाल जी ने मेरी बात का विरोध किया । श्री प्रकाश सिंह बादल जी कुछ कहने ही लगे थे।

मैंने उनका हाथ पकड़ा। थोड़ा किनारे होकर उनके कान में पंजाब में कहा – ”बादल साहब, असीं ता तुहाडे छोटे पराह- मेरा कांगड़ा तां पंजाब दा हिस्सा सी। तूसीं साडी थोड़ी मदद करो तां हिमाचल नूं हुणे ही कुछ मिल सकदा है।“प्रधानमंत्री जी पूरी तरह से हमारे पक्ष में थे। मैंने फिर जोर से कहा – प्रधानमंत्री जी कहने लगे – बात तो ठीक है। अधिकारी फिर बुलाये गये। बातचीत हुई और उसी समय हिमाचल प्रदेश को 15 मैगावाट बिजली अस्थाई रूप से देने का निर्णय हो गया। मैं इसके लिए श्री प्रकाश सिंह बादल जी का हमेशा धन्यवाद करता रहा हॅू। इतना बड़ा निर्णय इस प्रकार मनाना असंभव था। एक कारण यह भी था कि ठीक बात पर प्रधानमंत्री जी स्वयं निर्णय देते थे। बाद में हिमाचल के हिस्से का मामला सर्वोच्च न्यायालय में गया। हिमाचल के हक में फैसला हुआ। कई वर्षो के बाद हिमाचल को पूरा हिस्सा मिलना हुआ । परन्तु लगभग 25 साल तक 15 प्रतिशत अस्थाई रूप में हिस्सा ही मिलता रहा जो हजारों करोड़ रू0 बनता है।

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मैं जब तक सरकार में रहा हिमाचल का पूरा अधिकार प्राप्त करने के लिए केन्द्र सरकार से आग्रह करता रहा। आयोध्या में मस्जिद गिराये जाने के बाद हमारी सरकार भंग कर दी गई। उसके कुछ दिन के बाद हमने हिमाचल अधिकार यात्रा का ऐतिहासिक कार्यक्रम किया। पूरे प्रदेश से पंच से लेकर विधायक, सांसद लगभग पांच हजार निर्वाचित सदस्य यात्रा में दिल्ली तक गये। सबसे पहले चण्डीगढ़ में इकक्ठे हुए। वहां चण्डीगढ़ भाजपा की ओर से हमारा स्वागत और अल्पाहार हुआ। एक कार्यक्रम हुआ। भोजन का प्रबन्ध महेन्द्र नाथ सोफत जी के जिम्मे था। करनाल में हरियाणा भाजपा ने भोजन की व्यवस्था की और रात को लगभग एक हजार गाड़ियों का काफिला दिल्ली पहुंचा। दूसरे दिन प्रातःकाल सब धरने पर बैठे। श्री अटल बिहारी वाजपेयी , श्री कृष्ण लाल शर्मा, श्री लाल कृष्ण अडवाणी, श्री मदन लाल खुराना और श्री प्रेम कुमार धूमल साथ बैठे। दिल्ली के कुछ और प्रमुख नेता भी साथ थे। धरने के बाद कुछ प्रमुख नेताओं का शिष्टमण्डल राष्ट्रपति महोदय से मिला और ज्ञापन दिया। दिल्ली में रात को ठहरने का प्रबन्ध उसी निजामुद्दीन में हुआ था जिसकी पिछले दिनों बहुत चर्चा हुई। प्रबन्ध व्यवस्था कुछ ठीक नही थी। रात को कार्यकर्ता मच्छरों के कारण परेशान हुए परन्तु बड़ी मस्ती में सब रहे और दूसरे दिन सब लौटे। यह चित्र उसी ऐतिहासिक धरने का है।

हिमाचल का अधिकार प्राप्त करने के लिए हमने पूरा प्रयत्न किया ही था। परन्तु मुख्य मन्त्रियों की बैठक में 15 मैगावाट अस्थाई रूप से बिजली मिलने के निर्णय का सबसे अधिक श्रेय प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई को है। मेरा सौभाग्य है कि मेरे समय में जनता पार्टी के श्री मोराजी देसाई और कांग्रेस के श्री नरसिम्हा राव दोनो से मेरे बड़े अच्छे संबंध रहे। हिमाचल की कांग्रेस सरकार जो केन्द्र से नहीं करवा सकी वह मैं करवा सका। श्री मोरार जी देसाई से 15 मैगावाट बिजली का हिस्सा और श्री नरसिम्हा राव जी से हिमाचल प्रदेश को सभी बिजली योजनाओं में 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली की रायॅल्टी प्राप्त की। आज हिमाचल को इन से हजारों करोड़ रू0 की आय हो रही है।

श्री प्रकाश सिंह बादल जी से भी मधुर सम्बन्ध रहे। 1978 में उनके साथ मिल कर वर्शो से रूका हुआ थीन डैम समझौता किया। जिसके कारण हिमाचल प्रदेश को करोड़ों रू0 का लाभ हुआ।
श्री मोरारजी देसाई के साथ एक संस्मरण याद आ गया। वे कार्यालय में सब कुछ समय पर और नियम से करते थे। सभी मिलने वालो को न चाय पूछते थे और न ही पिलाते थे। उनकी मेज पर बादाम-काजू रखे तो होते थे परन्तु शायद कभी कोई खाता नही था। एक बार मैं और हरियाणा के डा0 मंगल सैन प्रधानमंत्री जी को मिलने गयें डा0 मंगल सैन संघ के पुराने प्रचारक और भाजपा हरियाणा के प्रमुख नेता बहुत ही विनोदप्रिय थे। श्री कृश्ण लाल शर्मा जी की तरह उनके साथ का समय भी बहुत हंसी में बीतता था। प्रधानमंत्री जी के साथ किसी विषय पर हमारी गंभीर बात चल रही थी।
श्री मोरारजी देसाई जी कुछ सोचने लगे और डाo मंगल सैन सामने पड़े बादाम-काजू को देखकर बोले – ”प्रधानमंत्री जी यह सब देखने के लिए ही है या खाने के लिये भी।“ बहुत कम हंसने वाले देसाई जी भी खूब हंसे और हमें खाने के लिए कहा – हमने बादाम खाये। बाद में नेताओं में चर्चा रही कि हम दोनो नेता प्रधानमंत्री के पास कुछ खाकर आये है।