हिमाचल उपचुनाव : जयराम सरकार की अग्निपरीक्षा, मूर्छित कांग्रेस को संजीवनी की तलाश

भाजपा कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनें उपचुनाव

नार्थ गजट संवाददाता। धर्मशाला, शिमला

देवभूमि हिमाचल के धर्मशाला और पच्छाद विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव जीतने को लेकर सत्तासीन भाजपा सरकार और विपक्षी कांग्रेसं दोनों ही बेताब हैं। दोनों ही दलों के लिए ये चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गए हैं। सत्तासीन भाजपा सरकार जहां इस उपचुनाव में अपनी विकासात्मक नीतियों को लेकर जनता के बीच जाएगी तो वहीं विपक्षी कांग्रेस सरकार की नाकामियों को जनता के बीच रखेगी।

इन विधानसभा उपचुनावों के परिणााम भले की सत्ता के सिंहासन के समीकरणों को बदलने का कोई मादा नहीं रखतें हों लेकिन इसके बावजूद दोनों दलों के लिए यह उपचुनाव अग्निपरीक्षा साबित हो रहे हैं। पहली बार मुख्यमंत्री बने जयराम ठाकुर के लिए तो इन उपचुनावों के नतीजे तो खास मायने रखते हैं। वैसे भी वह अंदरखाते कई बदलाव के बाद आए विरोधों का सामना कर रहे हैं। भाजपा अगर यह उपचुनाव जीत जाती है तो जयराम पर नौसिखिए और अनुभवहीनता का लेबल लगाने वाले अपने ही घर के विरोधियों का मुंह हमेशा के लिए बंद हो जाएगा।

वहीं दूसरे तरफ कांग्रेस के लिए ये उपचुनाव एक खोई हुई साख को बचाने की चुनौती है। कांग्रेस वर्तमान में सबसे बुरे दौर में गुजर रही है। देश में ही नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस इस समय सबसे कमजोर दिख रही है। इन उपचुनावों में अगर कांग्रेस को जीत मिलती है तो यह बीमार कांग्रेस के लिए रामबाण औषधि साबित होगी। हिमाचल में पिछले लोकसभा चुनावों में दो भाजपा के विधायकों के सासंद बनने पर धर्मशाला और पच्छाद विधानसभा सीटें खाली हो गई थीं। इन दोनों ही खाली सीटों के लिए 21 अक्तूबर को विधानसभा उपचुनाव होने जा रहे हैं जबकि 24 अक्टूबर को इनके नतीजे नतीजे आएंगे।

इस बार कांग्रेस ने पच्छाद विधानसभा सीट पर पुराने चेहरे गंगूराम मुसाफिर को चुनावी रण में उतारा है, तो भाजपा ने पच्छाद विधानसभा क्षेत्र से नए चेहरे रीना कश्यप को टिकट दिया गया है। मुसाफिर अपने अनुभव के सहारे कांग्रेस के किले को और मजबूत करने की कोषिष करेंगे तो वहीं रीना कष्यप सत्तासीन भाजपा सरकार का लाभ लेते हुए भाजपा की जीत सुनिष्चित करने की कोशिश करेंगी। रीना कश्यप 2006 से भाजपा की सदस्य हैं।इसके अलावा वह जिला परिषद की सदस्य रही हैं और भाजपा एससी मोर्चा की मीडिया सह प्रभारी पद पर भी हैं।

2017 विधानसभा चुनाव में भी गंगूराम मुसाफिर ने विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन वह बीजेपी के सुरेश कश्यप से हार गए थे। 2012 के विधानसभा चुनावों में मुसाफिर को बीजेपी के सुरेश कुमार कश्यप ने 2805 वोटों से हराया था। लेकिन मुसाफिर के लंबे अनुभव को देखते हुए कांग्रेस ने एक बार फिर उन पर दांव लगाया है। मुसाफिर 2012 में हारने से पहले 1982 से इस सीट पर जीतते आ रहे थे। वह मंत्री के अलावा, हिमाचल विधानसभा के स्पीकर भी रह चुके हैं।

धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव की बात करें तो यहां भी मुकाबला अपनों की बगावत के चलते काफी रोचक रहेगा। कांग्रेस के चिर परिचित चेहरे व पूर्व मंत्री सुधीर इस बार चुनाव लड़ने से कन्नी काट चुके हैं तो ऐसे में कांग्रेस ने नए चेहरे विजय इंद्र कर्ण चुनाव मैदान में उतारा है। उनके सामने भाजपा की तरफ से युवा नेता विशाल नैहरिया चुनाव लड़ रहे हैं।काफी दिन से इस विधानसभा सीट के लिए भाजपा में टिकट को लेकर माथापच्ची चल रही थी। नैहरिया अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता रहे हैं। इसके अलावा वह कॉलेज व रीजनल सेंटर में एससीए प्रधान भी रहे हैं। वर्तमान में वह भाजपा युवा मोर्चा के राज्य सचिव हैं।

गौरतलब है कि धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र से लगभग तीन दशक बाद भाजपा का चेहरा बदल रहा है। इससे पहले तक कांगड़ा से वर्तमान सांसद किशन चंद कपूर इस विधानसभा क्षेत्र का नेतृत्व कर रहे थे। भाजपा की जीत सुनिश्चित करने लिए नए चेहरे नैहरिया के लिए गददी समुदाय से संबंध रखना और भाजपा का सत्तासीन होना ही काफी नहीं रहेगा बल्कि उन्हें बागियों के भीतरधात की चुनौती को भी पार करना होगा। इसी तरह यहां कांग्रेस भी बागियों की चुनौती का सामना कर रही है। इस सीट के लिए लगभग दोनों ही राजनीतिक दलों से लगभग दर्जन भर उम्मीदवार टिकट के लिए लाबिंग कर रहे थे।