तिब्बती लोग शरणार्थी नहीं, हमारे समाज का महत्वपूर्ण अंग हैंः कौल सिंह

धर्मशाला
‘‘तिब्बतियन समुदाय के लोगों को वर्तमान समय के संदर्भ में शरणार्थी कहना अप्रसंगिक है। यह हमारे समाज का महत्वपूर्ण अंग है‘‘यह उद्गार हिमाचल प्रदेश के राजस्व, विधि एवं स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ने तिब्बतियन शिक्षा संस्थान ‘‘ मेन तसी खंग‘‘ के 54 वें वार्षिक स्थापना दिवस पर धर्मशाला के मैेंकलोडगंज स्थित तिब्बतियन मेडीकल एंड अस्ट्रो इन्संचयूट ऑफ एच.एच.द दलाईलामा में आयोजित समारोह में अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में प्रकट करते हुये कहा कि तिब्बत के लोगों के हिमाचल प्रदेश में इनकी लम्बी अवधि की रियाईश के चलते अब यह लोग भी प्रदेश की संस्कृति का हिस्सा बन गये है। प्रतिवर्ष भारत व विश्व भर के लाखों श्रद्वालु व पर्यटक तिब्बती धर्मगुरू महामहिम दलाईलामा के दर्शनों व आशीष लेने हेतु यहां पधारते है।

कौल सिंह ने इस अवसर पर जानकारी देते हुये बताया कि प्रदेश सरकार को माननीय न्यायलय ने आदेश दिये थे कि जिस प्रकार सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने के लिए स्थानीय लोगों पर कार्यवाही की जा रही है, उसी तर्ज पर तिब्बती शरणार्थीैयों के कब्जे भी हटाए जाये। प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग द्वारा केबिनेट में एक लीज पॉलसी निर्मित की गई जिसके अन्तर्गत जितने भी तिब्बतियों ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे किये है उनके कब्जे नहीं हटाये जायेंगे, लेकिन इन्हें प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित प्रपत्र को भर कर देना होगा, जिस पर प्रदेश सरकार कार्यवाही करके इन कब्जों को नियमित करने की प्रक्रिया अमल में लाएगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने अपने भाषण में तिब्बतियन चिकित्सा पद्वति के विषय में बोलते हुये कहा कि यह चिकित्सा पद्वति विश्व की श्रेष्ठतम चिकित्सा पद्वतियों में शुमार की जाती है और आज के परिवेश में यह एक अत्यंत लाभदायक, गुणकारी कारगर व सस्ती चिकित्सा पद्वति है, जिसमें बिना किसी साईड ईफॅैक्ट के मनुष्य की सभी बीमारियों का निदान सम्भव है। मौजूदा समय में विश्व भर में 55 तिब्बतियन चिकित्सा संस्थानों के माध्यम से मानवता की सेवा की जा रही है। अति गम्भीर बीमारियों का निदान भी तिब्बतियन चिकित्सा पद्वति द्वारा जड़ी-बूटियों के माध्यम से किया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा संचालित डॉ राजेन्द प्रसाद मेडीकल कॉलेज, टांडा तथा इदिरा गांधी मेडीकल कॉलेज, शिमला में भी तिब्बतियन समुदाय मे लोगों के लिए के लिए एक-एक सीट अरक्षित है जबकि शीघ्र आरंभ होने वाले प्रदेश के तीन नये मेडीकल कॉलेजों में भी इनके लिए सीटें अरक्षित करने का प्रावधान किया जायेगा।
कौल सिंह ने कहा कि तिब्बतियन चिकित्सा पद्वति के लिए प्रयुक्त किये जाने वाले औषधीय पौधों को उगाने के लिए अधिक उंचाई वाले सम्भावित क्षेत्रों में प्रदेश सरकार द्वारा 20 से 25 एकड़ भूमि तिब्बतियन संस्थान को लीज पर उपलब्ध करवाने के प्रयास किये जायेंगे।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश बेहतर चिकित्सा उपलब्ध करवाने वाला अग्रणी प्रदेश है। विशेषतयः ग्रामीण स्तर पर चलाई जा रही विभिन्न चिकित्सा योजनाओं का ब्यौरा देते हुये उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि लोगों को उनके घर-द्वार पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाये।

इस अवसर पर 20 से 30 वर्ष तक तिब्बतियन चिकित्सा संस्थान में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले चिकित्सकों को स्वास्थ्य मंत्री द्वारा प्रमाण-पत्र, सम्मान-पत्र व ‘खाता‘ पहना कर सम्मानित किया जबकि तिब्बतियन निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री डॉ लोबसंग सांगेय सिक्कयांेग, अध्यक्ष तिब्बतियन पॉर्लीयमेंट पेन्पा टीसेंरिग ने भी विभिन्न सत्रों के प्रशिक्षु चिकित्सकों को प्रमाण-पत्र वितरित किये।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री डॉ लोबसंग सांगेय सिक्कयांेग ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा तिब्बतियन लोगों को उपलब्ध करवाई जा रही विभिन्न सुविधाओं व सहयोग के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री वीरभद्र सिंह व उनकी सरकार का धन्यवाद किया, जबकि अध्यक्ष तिब्बतियन पॉर्लीयमेंट पेन्पा टीसेंरिग और स्वास्थ्य मंत्री डॉ टी छेरिंग वांगचूक तथा निदेशक स्वास्थ्य ‘‘ मेन तसी खंग‘‘ ने तिब्बतियन चिकित्सा पद्वति के संदर्भ में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और बताया कि 22 मार्च, 1961 को एक चिकित्सक के साथ आरंभ हुआ तिब्बतियन चिकित्सा पद्वति का यह पौधा 54 वर्ष के लम्बे सफर में पूर्णतया प्रगति की ओर अग्रसर है।

इस अवसर पर विधायक लाहौल स्पिति रवि ठाकुर,मुख्य चिकित्सा अधिकारी बीएम गुप्ता के अतिरिक्त विभिन्न विभागों के अधिकारी व तिब्बतियन समुदाय के लोग उपस्थित थे।