हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक की कक्षाओं के लिए मासिक परीक्षाएं

चंडीगढ़, 2 जनवरी-
हरियाणा सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक की कक्षाओं के विद्यार्थियों का सतत एवं व्यापक मूल्याकंन करने के लिए शैक्षणिक सत्र 2014-15 से सभी विषयों में मासिक परीक्षाएं लेने का निर्णय लिया है ताकि स्कूलों में शिक्षण एवं अध्ययन के स्तर को सुधारा जा सके।

स्कूल शिक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि ये परीक्षाएं स्कूल शिक्षकों द्वारा ली जाएंगी तथा प्रधानाचार्य एवं हैड टीचर इन परीक्षाओें का सुचारू संचालन सुनिश्चित करेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों द्वारा खंड प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों के परामर्श से मासिक मूल्याकंन के लिए डेटशीट तैयार की जाएगी। जनवरी, 2015 की मासिक परीक्षा के लिए पहली से पांचवी कक्षाओं के प्रश्न पत्र विभाग द्वारा केन्द्रीकृत स्तर पर तैयार किये जाएंगे ताकि उनमें समानता सुनिश्चित की जा सके। इसीप्रकार, फरवरी मास में आयोजित की जाने वाली मासिक परीक्षाओं के प्रश्न पत्र शिक्षकों द्वारा स्वयं प्राधानाचार्य एवं हैड टीचर के निरीक्षण में तैयार किये जाएंगे। इनमें विद्यार्थियों की अध्ययन क्षमता के आकलन पर बल दिया जाना चाहिए। छटी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए जनवरी एवं फरवरी, 2015 की मासिक परीक्षाओं के प्रश्न पत्र स्कूल स्तर पर तैयार किये जाएंगे।

उन्होंने कहा कि मार्च, 2015 की परीक्षाओं के लिए पहली से आठवीं कक्षाओं के प्रश्न पत्र महानिदेशक प्राथमिक शिक्षा द्वारा शैक्षणिक सत्र 2014-15 के दौरान पढ़ाये गये पूरे पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किये जाएंगे। प्रत्येक प्रश्न पत्र कुल 100 अंकों का होगा। उन्होंने कहा कि प्रश्न पत्रों का परम्परागत तर्ज पर होना आवश्यक नहीं है तथा 25 प्रतिशत अंक गतिविधि आधारित अध्ययन या आतंरिक मूल्याकंन की अन्य पद्घतियों के माध्यम से विद्यार्थियों के अध्ययन स्तरीय क्षमताओं के आकलन के लिए रखे जाएंगे।

उन्होंने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं का आकलन विषय शिक्षकों द्वारा स्वयं किया जायेगा तथा वे स्कूल रजिस्टर में परिणामों को निर्धारित फॉरमेट में सारणीबद्घ करेंगे। इसीप्रकार, प्रधानाचार्य या हैडटीचर द्वारा समस्त स्कूल के परिणामों को निर्धारित फारमेट में सारणीबद्घ किया जायेगा तथा उसे खण्ड प्राथमिक शिक्षा अधिकारी को ई-मेल द्वारा तथा दस्ती तौर पर उपलब्ध करवाना होगा। संबंधित प्रधानाचार्य या हैडटीचर द्वारा दो कार्य दिवसों में निर्धारित फारमेट में जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी को परिणाम प्रेषित करने होंगे, जो आगामी दो कार्य दिवसों में मुख्यालय द्वारा विकसित किये जाने वाले साॅफटवेयर में उसे अपलोड करेंगे। महानिदेशक प्राथमिक शिक्षा द्वारा आगामी दो कार्य दिवसों में परिणामों का संकलन किया जायेगा और उसे विभाग की वैबसाइट www.harprathmik.gov.in पर उपलब्ध करवाएंगे।

प्रवक्ता ने कहा कि विद्यार्थियों के अध्ययन स्तर की मासिक आधार पर आकलन की यह प्रक्रिया शैक्षणिक सत्र 2015-16 में कुछ संशोधन के साथ जारी रहेगी। संशोधन के अनुसार इस शैक्षणिक सत्र में सितम्बर एवं मार्च मास के प्रश्न पत्र प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा तैयार किये जाएंगे। शेष मास अप्रैल, मई, जुलाई, अगस्त, अक्तूबर, नवम्बर, दिसम्बर, जनवरी और फरवरी की मासिक परीक्षाएं शिक्षकों द्वारा स्वयं ली जाएंगी और प्रश्न पत्र भी स्वयं तैयार किये जाएंगे। मास सितम्बर एवं मार्च को छोड़ कर शेष महीनों की मासिक परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाएं क्लास टीचर या विषय अध्यापक द्वारा आंकी जाएंगी। सितम्बर एवं मार्च मास की उत्तर पुस्तिकाओं का आकलन स्कूल टीचरों की बजाए अन्य शिक्षकों द्वारा किया जायेगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि स्कूल टीचरों तथा स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ता द्वारा किये गये मूल्यांकन में कोई विशेष अंतर तो नहीं है।

उन्होंने कहा कि सभी सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को निर्देश दिये गये हैं कि प्रश्न पत्र तैयार करते समय तथा उत्तर पुस्तिकाओं का आकलन करते समय किसी प्रकार का पक्षपात न किया जाये। सभी प्रश्न पत्रों एवं उत्तर पुस्तिकाओं को एक वर्ष की अवधि के लिए संभाल कर रखा जायेगा। निरीक्षक अधिकारी कोई भी प्रश्न एवं उत्तरपुस्तिका निकाल कर और संबंधित विद्यार्थी को बुला सकते हैं तथा मूल्यांकन की शुद्धता की जांच कर सकते हैं। यदि उनके मूल्यांकन तथा थर्ड पार्टी निरीक्षण या मूल्यांकन के आधार पर परिणामों में अधिक अंतर पाया जायेगा तो संबंधित शिक्षक के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी।

उन्होंने कहा कि कईं जिलों में यह पाया गया है कि जिलों के अधिकतर स्कूलों में नौवीं कक्षा का परिणाम शत प्रतिशत रहा है जबकि दसवीं की बोर्ड की परीक्षाओं में उनका परिणाम 30 प्रतिशत से 50 प्रतिशत के बीच रहा। इससे स्पष्ट है कि नौवीं कक्षा में किया जाने वाला मूल्यांकन केवल एक स्वांग है जिसके लिए निदेशक माध्यमिक शिक्षा को अलग से कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये हैं।