पर्यावरण के नियमों से संबंधित औचारिकताएं पूरी नहीं करने वाले निजी विश्वविद्यालयों पर होगी कार्रवाई
02 जनवरी । हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि राज्य में पर्यावरण के नियमों की अनदेखी बिल्कुल भी नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिन निजी विश्वविद्यालयों ने पर्यावरण के नियमों की अनदेखी की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हिमाचल प्रदेश प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड ने पहले ही रैयत बहारा विश्वविद्यालय को पर्यावरण की धज्जीयां उड़ाने के लिए नोटिस दिया है। साथ ही बोर्ड में सभी लंबित मामलों को जल्द निपटाएगा। इसके अलावा पिछली भाजपा सरकार ने प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड की पूरी तरह से अन्देखी की है।
कुलदीप सिंह पठानिया ने बुधवार को शिमला में पत्रकारों को संबोधित हुए पूर्व सरकार की आलोचना की और कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है की पिछले पांच सालों में बोर्ड को जो कानूनी शक्ल मिलनी चाहिए थी वह नहीं मिली। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व वन मंत्री से मिल कर प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड के प्रबंधन मंडल का गठन करेंगे। पठानिया ने कहा कि पर्यावरण हिमाचल का सबसे बड़ा संसाधन है। पूर्व की कांग्रेस सरकारों ने हिमाचल में पर्यावरण मित्र उद्योग लगाए।
पठानिया ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि हिमाचल में उद्योगों को बढ़ावा मिलेए लेकिन उन्हें पर्यावरण नियमों का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को नुकसान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि हिमाचल में कुल 6805 उद्योग हैंए जिसमें 6001 छोटे, 383 मध्यम तथा 421 बड़े उद्योंगों की श्रेणी में आते हैं। साथ ही इनमें से 1029 उद्योग रेड, 2682 ओरेंज, तथा 3094 ग्रीन श्रेणी में हैं। प्रदुषण को लेकर इन सभी उद्योगों पर बोर्ड नजर रखता है। बॉयोमैट्रिक वेस्ट को लेकर बोर्ड 564 निजी व सार्वजनिक अस्पतालों पर भी नजर रखता है। साथ ही सीवरेज प्रदूषण पर नजर रखने के लिए होटल भी बोर्ड से बचे नहीं है।
हिमाचल प्रदेश में सबसे प्रदुषित क्षेत्र कालाअंब व बद्दी हैं। हिमाचल प्रदेश प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड हिमाचल में प्रदुषण को जानने के लिए नाईट्रोजनए सल्फरडाईऑक्साईड व एसपीएम का आंकलन करता है। इन क्षेत्रों में कई बार एसपीएम निर्धारित मात्रा से अधिक पाई जाती है। यह मात्रा उस समय अधिक होती है जब इन क्षेत्रों में ट्रक अधिक गुजरते हैं। यह क्षेत्र हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र हैं।