सरकार छोटे व्यापारियों के हित सुरक्षित बनाने के प्रति कृतसंकल्प : मुख्यमंत्री

शिमला, 07 दिसंबर । मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि प्रदेश सरकार छोटे व्यापारियों एवं उद्यमियों के हितों को सुरक्षित बनाने के प्रति कृतसंकल्प है, जिसके लिए राज्य के खुदरा बाजार में सीधे विदेशी निवेश के कार्यान्वयन को स्वीकृति नहीं दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा को पत्र लिखकर यह जानकारी दी, जिसमें उन्होंने हिमाचल प्रदेश में एफडीआई पर राज्य सरकार की राय को स्पष्ट किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में शिक्षित बेरोजगार छोटे व्यापार से जुड़े हैं। एफडीआई के आने से इन छोटे व्यापारियों को अपने परिवार के लिए दो जून की रोटी जुटाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने आनंद शर्मा द्वारा लोक सभा में एफडीआई पर हिमाचल प्रदेश की राय बारे दिए गए गुमराह करने वाली वक्तव्य पर आश्चर्य व्यक्त किया। आनंद शर्मा ने संसद में बहस के दौरान एफडीआई की स्वीकृति के लिए ससंद की सहमति पाने के लिए यह वक्तव्य दिया, जो तथ्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि आनंद शर्मा ने कभी भी प्रदेश सरकार से किसी भी स्तर पर राज्य में एफडीआई के कार्यान्वयन पर सहमति के बारे सम्पर्क नहीं किया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा देश में एफडीआई का विरोध किया है और हिमाचल प्रदेश में भी इसका विरोध किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में किसी भी तरीके से खुदरा बाजार में एफडीआई को स्वीकृत न करने के लिए कृतसंकल्प है।
धूमल ने कहा कि प्रदेश सरकार ने आनंद शर्मा से कई बार सेब पर आयात शुल्क को बढ़ाने का आग्रह किया ताकि राज्य के सेब उत्पादकों के हितों को सुरक्षित बनाया जा सके, परन्तु उन्होंने इसे स्वीकार तक नहीं किया। उन्होंने कहा कि सेब उत्पादन राज्य के फल उत्पादकों की आय सृजन गतिविधियों का मुख्य स्रोत है तथा यह केन्द्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है कि वे विदेशों से आयात होने वाले सेब को निरूत्साहित करने के लिए उस पर भारी शुल्क लगाए। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में आयात शुल्क को बढ़ाने के साथ-साथ सेब के आयात पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए, जिससे सेब उत्पादक लाभान्वित हुए और उन्हें उनके उत्पाद के अच्छे मूल्य मिले। उन्होंने कहा कि एफडीआई देश के व्यापक हित में नहीं है, क्योंकि यहां अधिकांश जनसंख्या छोटे व्यापार में संलग्न है। एफडीआई के आने से देश के करोड़ों लोग बेरोजगार हो जाएंगे और उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से आग्रह किया कि वे देश के गरीब एवं उपेक्षित लोगों के आर्थिक स्तर को ध्यान में रख कर ही इस तरह के निर्णय लें।