मंत्रिमण्डल ने तय किया किन्नू/मालटा/संतरा तथा गलगल का भाव 6 रुपये प्रति किलोग्राम

शिमला, 09 नवबंर ।

हिमाचल प्रदेश मंत्रिमण्डल की आज यहां आयोजित बैठक में वर्ष 2012-13 के दौरान किन्नू प्रजाति के फलों के लिए मण्डी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) को स्वीकृति प्रदान की गई। इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश के फल उत्पादक क्षेत्रों में 54 प्रस्तावित प्रापण केन्द्रों के माध्यम से एचपीएमसी, एपीएआईसी एवं हिमफैड की प्राधिकृत एजेंसियों द्वारा उत्पादकों से किन्नू, मालटा, संतरा एवं गलगल इत्यादि फलों का प्रापण किया जाएगा।
इस योजना के अन्तर्गत 27,395 मीट्रिक टन के कुल अनुमानित उत्पाद में से 500 मीट्रिक टन किन्नू/मालटा/संतरा तथा 100 मीट्रिक टन गलगल की खरीद प्रस्तावित है। किन्नू/मालटा/संतरा तथा गलगल 6 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से तथा सी ग्रेड का फल क्रमश: 5.50 रुपये प्रति किलोग्राम एवं 4.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जाएगा। प्राधिकृत एजेंसियां किन्नू/मालटा/संतरे की खरीद के लिए 2.65 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से रख-रखाव शुल्क की हकदार होंगी, जबकि गलगल के लिए यह शुल्क एक रुपये प्रति किलोग्राम की दर से होगा। यह योजना 20 नवम्बर, 2012 से 15 फरवरी, 2013 की अवधि के दौरान कार्यान्वित की जाएगी।
मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में इस सेब मौसम के दौरान एमआईएस के तहत प्रापण किए गए 10,000 मीट्रिक टन अथवा खरीदे गए कुल सेब को एचपीएमसी को नि:शुल्क उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया गया है ताकि वे इससे सेब जूस का उत्पादन कर सकें।
मंत्रिमण्डल ने सेब मौसम 2010 के दौरान, जब राज्य में सेब का रिकार्ड उत्पादन हुआ, एमआईएस के अन्तर्गत खरीदे गए सेब के लिए एचपीएमसी के लिए 1.46 रुपये प्रति किलोग्राम वास्तविक विक्रय मूल्य तथा हिमफैड के लिए 3 रुपये प्रति किलोग्राम के अनुमानित मूल्य के मुकाबले 1.57 रुपये प्रति किलोग्राम को स्वीकृति प्रदान की।
बैठक में प्रदेश के शीतोष्ण खण्ड में पाये जाने वाले औषधीय पौधे ‘नाग छतरी’, ‘ट्रिलियम गोवेनियम’, की तस्करी पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने को स्वीकृति प्रदान की, जिसके लिए सम्बन्धित क्षेत्रीय कर्मियों को निर्देश दिए जाएंगे।