वीरभद्र सिंह पर भाजपा का पलटवार

शिमला, 07 सितम्बर।

विधानसभा चुनावों का बिगुल बजने से पहले ही सतारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस पार्टी के बीच वाकयुद्व शुरू हो गया है। भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष वीरभद्र सिंह पर तथ्यहीन आंकड़े पेश कर जनता को गुमराह करने का आरोप जड़ा है। भाजपा ने सिंह के उस बयान को निराधार और झूठा करार दिया है, जिसमें उन्होंने भाजपा सरकार पर केंद्र द्वारा प्रायोजित विभिन्न योजनाओं के तहत 1256 करोड़ राशि खर्च करने में असफल रहने का आरोप लगाया था।
भाजपा प्रवक्ता गणेश दत ने आज पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि सिंह गलत आंकड़े देकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। दत ने पूछा कि सिंह 1256 करोड़ की रकम का बे्रकअप बताएं कि किस-किस मद में राज्य सरकार इस राशि को खर्च नहीं कर पाई है।
दत ने कहा कि हिमाचल की इस साल वार्षिक योजना 3700 करोड़ स्वीकृत हुई है। गत वर्ष यह धनराशि 3300 करोड़ और प्रथम वर्ष 3000 करोड़ की थी। योजना आयोग ने इस रकम का शत-प्रतिशत खर्च करने पर राज्य की प्रशंसा की है और इसी का परिणाम है कि गत चार सालों में राज्य बीस सूत्रीय कार्यक्रम में अव्वल रहा। दत ने कहा कि सिंह बताए कि अगर राज्य योजना आयोग की रकम खर्च करने में असफल रहती तो लगातार चार सालों मेेंं हिमाचल को अव्वल क्यों आंका जाता।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2011-12 में राज्य ने सर्वशिक्षा अभियान के तहत 95 फीसदी और मिड डे मील में 92 फीसदी खर्च किया है। एनएचआरएम के तहत राज्य ने 86 फीसदी लक्ष्य पूरा किया, सर्वशिक्षा अभियान में सबसे अधिक धनराशि खर्च करने में राज्य सफल रहा।  राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत जो प्रस्ताव राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष रखे, उन्हें मंजूरी नहीं दी गई और जितनी राशि अनुदान के तहत मिली, उसे शत-प्रतिशत खर्च किया गया। उन्होंने कहा कि जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत केंद्र से वर्ष 2012-13 में 40 करोड़, वर्ष 2011-12 में 30 करोड़ रूपये मिला है।

भाजपा प्रवक्ता ने केंद्र की यूपीए सरकार पर राज्य के साथ भेदभाव का आरोप लगाया और कहा कि 13वें वित आयोग ने जहां अन्य राज्यों के योजना आकार में 126 फीसदी की वृद्धि की, वहीं हिमाचल के योजना आकार को मात्र 50 फीसदी बढ़ाया गया। इसके चलते राज्य को 10725 करोड़ का घाटा हुआ। उतरी पूर्वी राज्यों और जम्मू-कश्मीर को कई योजनाओं में केंद्र सरकार 90 फीसदी अनुदान दे रहा है, यहां भी हिमाचल के साथ भेदभाव हो रहा है।