विस चुनावों में सही टिकट आवंटन दोनों दलों के लिए चुनौती

शिमला, 09 सितम्बर।

आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राज्य की प्रमुख सियासी पार्टियों भाजपा और कांग्रेस में टिकट आवंटन को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। दोनों दल इस महीने अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करेंगे। दोनों राजनीतिक दल योग्य और जिताऊ प्रत्याशियों को मैदान में उतारकर चुनावी रण में मनोवैज्ञानिक फायदा वटोरने की कोशिश करेंगे। सतारूढ़ भाजपा की अपेक्षा कांग्रेस में टिकट आवंटन पर गतिरोध गहराने के अधिक आसार माने जा रहे हैं। ऐसा इसलिए कि कांग्रेस की कमान कद्दावर नेता व पांच बार सीएम रह चुके वीरभद्र सिंह के हाथों में है तथा उनके हर विधानसभा क्षेत्र में बड़ी तादाद में समर्थक मौजूद हैं। जबकि वीरभद्र से पहले लगातार दो बार कांग्रेस अध्यक्ष रहे कौल सिंह के भी कई विस क्षेत्रों में समर्थक हैं। लिहाजा कौल के हाथों से कमान खिसकने के बाद उनके समर्थक उहापोह की स्थिति में हैं।

आए दिनों राज्य के विधानसभा क्षेत्रों से वीरभद्र सिंह के दरबार में टिकट के तलबगार शक्ति प्रदर्शन के जरिए टिकट सुनिश्चित करने की कोशिश में नजर आ रहे हैं। हालांकि वीरभद्र सिंह ने दो टूक कहा है कि जिताऊ और सशक्त प्रत्याशी को ही टिकट मिलेगा। यह भी दीगर है कि कांग्रेस पार्टी में चुनावों के लिए प्रत्येक विस क्षेत्रों से आवेदन मांगे गए हैं। ब्लाक, जिला और राज्य कमेटी के माध्यम से कई हल्कों से दर्जनों प्रत्याशियों के आवेदन पहुंचे हैं।
उधर, सतारूढ़ भाजपा में सबसे बड़े राजनीतिक जिले कांगड़ा में पार्टी दिग्गजों की आपसी खींचतान को मिटाकर समन्वय स्थापित करना एक चुनौती है। शांता के सिपहसालार मंत्री रमेश धवाला और धूमल समर्थक अन्य मंत्री रविंद्र सिंह रवि के मध्य चुनावी क्षेत्र को लेकर गतिरोध कायम है। धवाला अपने विस क्षेत्र ज्वालामुखी छोडऩे को तैयार नहीं हैं और रवि अपने थुरल हल्के का अस्तित्व मिटने के बाद ज्वालामुखी और पालमपुर से चुनाव में उतरना चाहते हैं। पालमपुर से भी शांता समर्थक प्रवीण शर्मा सिंटिंग एमएलए हैं। शांता खेमे के निशाने पर रहते आए नूरपुर हल्के से भाजपा एसोसिएट विधायक राकेश पठानिया इस बार पार्टी से टिकट लेने के जुगाड़ में हैं। टिकट फाइनल करने से पूर्व इस हल्के में गुटबाजी मिटाने पर पार्टी का जोर रहेगा। इसके अलावा भाजपा के दिग्गज नेता जगत प्रकाश नड्डा के राज्यसभा में जाने के बाद उनके विस हल्के में भी टिकट के कई दावेदार सामने आए हैं। पूर्व सांसद सुरेश चंदेल यहां अपना दावा ठोक रहे हैं, जो कि उनके विरोधियों को रास नहीं आ रहा है।
शिमला जिले से भाजपा नरेंद्र बरागटा और सुरेश भारद्वाज को छोडक़र अन्य छह सीटों पर नए चेहरों पर दांव खेल सकती है। भाजपा के लिए सही टिकट आवंटन मिशन रिपीट का लक्ष्य तय करेगा। पाटी ने इस बार भीतरघात से बचने के लिए प्रत्याशियों से आवेदन नहीं मांगे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार सर्वे रिपोर्ट और प्रदेश के आलानेताओं की संस्तुति प्रत्याशी के चयन का आधार बनेगी। बहरहाल चुनावी बिगुल बजने वाला है और सत्ता पर काबिज होने के लिए दोनों सियासी पार्टियों के समक्ष सही टिकट आवंटन की मुख्य भूमिका रहने वाली है। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस के समक्ष भीतरघात और गुटबाजी को रोकना मुख्य चुनौती होगी।