बिजली बोर्ड के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारी लामबंद

शिमला, 10 सितम्बर ।

हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड इंपलाईज़ यूनियन के अवाहन पर आज बिजली बोर्ड बचाओ अभियान के अन्तर्गत पुरे प्रदेश में बिजली बोर्ड के कार्यालयों के बाहर कर्मचारियों व पेंशनरों ने दिन में भोजनावकाश के दौरान सरकार व प्रबन्धन वर्ग की बोर्ड विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसमें बिजली उपभोक्ताओं ने भी भाग लिया। इस अवसर पर यूनियन के पदाधिकारियों ने प्रदेश की जनता से भी राज्य बिजली बोर्ड को निजी हाथों में जाने से रोकने में अपना सहयोग देने की अपील की।
काबिलेगौर है कि राज्य बिजली बोर्ड की बिगड़ती आर्थिक स्थिति व कर्मचारियों की घटती संख्या के विरोध में राज्य बिजली बोर्ड के कर्मचारी पिछले कई महीनों से संघर्षरत है और सरकार से बोर्ड की आर्थिक स्थिति को सुधारने व बोर्ड में तकनीकी, कमर्शीयल व अन्य श्रेणी के कर्मचारियों की भर्ती की मांग कर रहे हैं।

इस अवसर पर बोर्ड मुख्यालय कुमार हाउस शिमला में कर्मचारियों को संबोधित करते हुए यूनियन के प्रदेषाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाडा ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार बिजली बोर्ड का 468 करोड़ रुपये निजी कंपनियों व अन्य संस्थाओं से दिलाने में विफल रही। इसके विपरीत पिछले दिनों सरकार द्वारा बोर्ड को बीबीएमबी से मिलने बाली बिजली को उत्पादन दर के बजाए मार्केट रेट पर बेचने के फैसले से बोर्ड के उपर लगभग 290 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया। वहीं प्रदेश सरकार की हिस्से की बिजली भी बोर्ड को मंहगी दरों पर खरीदनी पड रही है। परिणामस्वरुप बोर्ड को एक रुपये से अधिक  का घाटा प्रति यूनिट उठाना पड़ रहा है
उन्हने कहा कि यूनियन बिजली बोर्ड बचाओ संघर्ष को और तेज करेगी तथा इसके अब पूरे प्रदेश में जनता के बीच ले जाएगी। जिसके अन्तर्गत मंडल व उप-मंडल स्तर पर कर्मचारियों, पेंशनर्ज एवं उपभोक्ताओं की संयुक्त बैठक कर वर्तमान की उर्जा नीतियों में संशोधन व बोर्ड की वितीय स्थिति हालात सुधारने के लिए सरकार पर और दबाव डालेगी। इस अवसर पर यूनियन के पदाधिकारियों राकेश कुमार, ओपीजस्टा, सितेन्द्र वर्मा, सुन्दर जिस्टु, विजय ठाकुर, रोशन कुमार, देवेन्द्र शर्मा, हेम चन्द, भुपेन्द्र व डीपी वर्मा ने भी कर्मचारियों को संबोधित किया।