दिवंगत छात्राओं की आत्मशांति के लिए निकाला कैंडल मार्च

शिमला, 30 सितंबर ।

शिमला के कानवेंट जीसस एंड मैरी (चैल्सी) स्कूल में दो छात्राओं साक्षी और नैंसी की रहस्मयी हालातों में मौत के बाद शहर के हजारों लोगों ने आज उनकी आत्मशांति के लिए कैंडल मार्च निकाला। इसमें चेल्सी सहित शहर के कई स्कूली छात्रों, विभिन्न गैर सरकारी संस्थाएं, संगठन व छात्रों के अभिभावकों ने हिस्सा लिया। दिवंगत छात्राओं की आत्मशांति के लिए रविवार शाम को लोगों ने नवबहार चौक में इक्ा होकर संजौली तक हाथ में मोबत्तियां जलाकर मार्च किया और फिर कैंडल मार्च करते हुए संजौली बाजार से वापिस काला ढांक उस स्थान पर पहुंचे, जहां दोनों स्कूली छात्राओं के शव मिले थे। काला ढांक पर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।

कैंडल मार्च में शामिल चेल्सी स्कूल की एक पूर्व छात्रा ने बताया कि इस मार्च को आयोजित करने का मकसद जन चेतना को जगाना है। उन्होंने कहा कि कानून व पेरेंट्स अपना कार्य कर रहे हैं। लेकिन आम नागरिक जिन के सामने यह घटनाक्रम हुआ है वह इस मुद्दें पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं।
आशादीप संस्थान के अध्यक्ष सुशील तनवर ने कहा कि सुसाइड करने की क्या वजह रही है इस पर मंथन करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि घटना स्थल पर मददके लिए आम लोग क्यों नहीं आए। इस के लिए जन चेतना को जगाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस घड़ी में सभी को एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है।
राजधानी के चैल्सी स्कूल में मौत अपने पिछे कई सवाल छोड़ गई है। डीएवी न्यू शिमला स्कूल में प्लस टू की छात्रा चाहत अरोड़ा व महक का कहना है कि दोनों छात्राएं काफी देर तक सडक़ पर पड़ी रही। यह मार्ग दिनभर वाहनों की आवाजाही से व्यस्त रहता है। आखिर क्यों लोगों ने समय पर इन्हें उठाकर अस्पताल पहुंचाने की जहमत क्यों नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि यदि समय पर इन्हें अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद इन की जान बच जाती।