न मैंने इस्तीफा दिया और न ही कोई बर्किंग प्रेसिडेंट बना : कौल सिंह

शिमला, 19 अगस्त ।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ठाकुर कौल सिंह ने हिमाचल में बर्किंग प्रेसिडेंट की तैनाती की बातों को पूरी तरह नकार दिया है। वीरभद्र समर्थक व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगू राम मुसाफिर के कार्यकारी अध्यक्ष बनने और अपने इस्तीफे की बातों को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अफवाहें करार दिया है। आज संवाददाताओं से बातचीत में कौल सिंह ने कहा कि उन्होंने न तो कोई इस्तीफा हाईकमान को दिया और न ही पार्टी में कोई बर्किंग प्रेसिडेंट बनाया गया।

गौर हो कि आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर वीरभद्र समर्थकों की तरफ से गंगू राम मुसाफिर को कौल सिंह के समांतर बर्किंग प्रेसिडेंट बनाने की बातें जोर-शोर से उठ रही थीं। वीरभद्र समर्थकों का कहना था कि बर्किंग प्रेसिडेंट पर गंगू राम मुसाफिर का नाम हाईकमान ने तय कर दिया है और इसकी अधिसूचना जारी होना शेष है। मगर अब कौल सिंह द्वारा इस नियुक्ति को नकारने से वीरभद्र खेमे को जोरदार झटका लगा है और प्रदेश कांग्रेस के नेताओं में वर्चस्व की लड़ाई भी जगजाहिर होने लगी है।
कौल सिंह ने दावा किया कि बकौल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पार्टी के 80 प्रतिशत कार्यकर्ता उनकी कार्यप्रणाली से खुश हैं तथा प्रदेश में कांग्रेस संगठन एक टीम की तरह काम कर रहा है। उन्होंने इस्तीफे व बर्किंग प्रेसिडेंट की अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने इस्तीफे की कोई पेशकश हाईकमान के समक्ष नहीं रखी। उन्होंने कहा कि मेरे लिए पार्टी सुप्रीम है, व्यक्ति विशेष नहीं। पार्टी अध्यक्षा सोनिया गांधी द्वारा जब उनसे इस्तीफा मांगा जाएगा तो वह उन्हें सौंपनें में जरा भी देर नहीं लगाऐंगे।

कौल ने कहा कि हाईकमान के पास बर्किंग प्रेसिडेंट नियुक्त करने का विचार नहीं चल रहा है। कौल के अनुसार पार्टी को कमजोर करने वाले और भाजपा के हाथों खेलने वाले लोग ऐसी बातों को हवा दे रहे हैं। कौल सिंह ने साफ तौर पर कहा कि बर्किंग प्रेसिडेंंट का मसला हाईकमान के संज्ञान में नहीं है और इस नियुक्ति की प्रदेश में जरूरत ही नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा अध्यक्ष की मौजूदगी में कार्यकारी अध्यक्ष का काम क्या रह जाएगा। प्रदेश कांगे्रस के इतिहास में ऐसा आज तक कभी नहीं हुआ है।

 
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ तकरार हो लेकर पूछे एक सवाल के जबाव में कौल सिंह ने कहा कि वीरभद्र कांगे्रस के वरिष्ठ और सम्माननीय नेता हैं और वह स्वयं वीरभद्र के समर्थक रहे हैं। वीरभद्र सिंह को लोकसभा चुनावों में मंडी जिला से बढ़त मिली थी। बकौल कौल उन्होंने कभी भी वीरभद्र के खिलाफ बयानबाजी नहीं की और अब वीरभद्र को ऐसा क्यों लगता है कि मैं उन्हें कमजोर कर रहा हूं।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश कांग्रेस संगठन की कार्यप्रणाली से नाखुश पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने हाईकमान के समक्ष कार्यकारी अध्यक्ष की तैनाती की मांग उठाई है, ताकि उनके अधिकतर समर्थकों को विस चुनावों में टिकटें दिलाई जा सकें। वीरभद्र समर्थक पिछले काफी समय से हाईकमान के समक्ष वीरभद्र को चुनाव पूर्व नेता घोषित करने की पैरवी करते आए हैं। लेकिन यह मानने को हाईकमान तैयार नहीं हुआ है, हालांकि वीरभद्र को विस चुनाव लडऩे के  लिए ग्रीन सिग्नल पार्टी से मिल गया है।