केंद्रीय छात्र संघ चुनावों में विद्यार्थी परिषद की बादशाहत कायम

शिमला, 24 अगस्त ।

हिमाचल में शांतिपूर्वक संपन्न हुए केंद्रीय छात्र संघ चुनावों में इस बार भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अपनी बादशाहत कायम रखी है। वर्ष 2001 से चुनावों में परिषद लगातार प्रथम स्थान पर काबिज रहा है। विधानसभा चुनावों की आहट से पहले चुनावों में परिषद की जीत भाजपा पार्टी के लिए संजीवनी का काम करेगी। प्रदेश भर के 97 कॉलेजों में 392 सीटों पर हुए चुनाव में एबीवीपी 205 सीटें जीतने का दावा कर रही है। वहीं एनएसयूआई ने 145 सीटें जीतने का दावा किया है। एबीवीपी के प्रांत संगठन मंत्री नवीन शर्मा का कहना है कि प्रदेश भर के कॉलेजों में इस बार संगठन को 15 सीटों का फायदा हुआ है। पिछली बार उनकी 190 सीटें थी।

एनएसयूआई पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वह सिर्फ 95 सीटों पर ही सिमटी है। जबकि माकपा समर्थित छात्र संगठन एसएफआई महज 56 सीटें ही जीत पाई है। नवीन शर्मा का कहना है कि एबीवीपी के सबसे ज्यादा 48 एससीए अध्यक्ष चुनाव जीते हैं। इससे साफ हो गया है कि इस बार वह छात्र परिषद चुनाव में भारी मतों से जीत दर्ज करेंगे।
विद्यार्थी परिषद ने छात्र परिषद चुनाव अक्तूबर माह में करवाए जाने की मांग की। नवीन ने कहा कि बीते वर्ष छात्र परिषद चुनाव नहीं करवाए गए थे लेकिन इस बार विद्यार्थी परिषद मांग करती है कि यह चुनाव अक्तूबर माह में करवाए जाएं। उन्होंने कहा कि छात्र परिषद चुनाव बहाली के बाद से 3 वर्षों तक छात्र परिषद के चुनाव हुए और विद्यार्थी परिषद ने जीत दर्ज की थी और बीते वर्ष यह चुनाव नहीं करवाए गए थे।

एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष यदुपति ठाकुर ने शिमला में प्रेस वार्ता में कहा कि  कई स्थानों पर हार का कारण कांग्रेस पार्टी की आपसी फूट हैं। पार्टी की आपसी फूट का संगठन पर नकारात्मक असर पड़ा है। इसके बावजूद भी संगठन ने 145 से अधिक सीटें प्रदेश में जीती है। उन्होंने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि छात्र संघ चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग हुआ है। भाजपा सरकार के मंत्रियों ने एबीवीपी के प्रत्याशियों को जिताने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाए हैं। यदुपति ठाकुर का कहना है कि वह जल्द ही छात्रसंघ चुनाव की रिपोर्ट को हिमाचल कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष, हिमाचल प्रभारी और युवा नेता राहुल गांधी को सौंपेंगे। इसके अलावा जिन कॉलेजों में एनएसयूआई हारी है वहां हार की समीक्षा की जाएगी।