एससीए चुनावों पर फैसला कल, प्रदेश विवि सहित कॉलेजों में पढ़ाई ठप्प

शिमला, 13 अगस्त ।

हिमाचल प्रदेश में छात्र चुनावों पर चल रहा घमासान अब थमता नजर आ रहा है। छात्र संगठनों के दबाव के आगे विवि प्रशासन झुक गया है। चुनावों को लेकर विवि प्रशासन ने मंगलवार को कार्यकारी परिषद की आकस्मिक बैठक बुलाई है। बैठक में छात्र चुनावों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

सोमवार को छात्र संयुक्त समन्वय समिति के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक में कुलपति प्रो. एडीएन वाजेपयी ने कहा कि एससीए के प्रत्यक्ष चुनावों को लेकर ईसी (कार्यकारी परिषद) की बैठक में फैसला लिया जाएगा। उन्होंने छात्र नेताओं से अपना आंदोलन समाप्त करने का आग्रह किया। कुलपति ने कहा कि वहचुनाव करवाने के खिलाफ नहीं हैं, मगर गत दिनों जिस तरह विवि हास्टल में छात्र हिंसा के कारण माहौल बिगड़ा है, यह चिंता का विषय है। उन्होंने छात्रों से विवि कैंपस और कॉलेजों में नारेबाजी नहीं करने और शांतिपूर्वक माहौल बनाने का आहवान किया।
छात्र संयुक्त समन्वय समिति के सदस्य यदुपति ठाकुर ने बताया कि छात्र संगठनों की कुलपति से बातचीत हुई है और कुलपति ने सीधे चुनाव करवाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि छात्र चुनाव बहाल होने पर समिति अपने आंदोलनों को वापिस लेगी।
इससे पहले सोमवार को प्रदेश विवि सहित कॉलेजों में छात्र संगठनों ने कक्षाओं का पूर्ण रूप से बहिष्कार किया। विवि तथा प्रदेश के 99 कॉलेजों में दिन भर पढ़ाई नहीं हुई। छात्र संयुक्त समन्वय समिति ने चुनाव बहाली की मांग पर एक दिन का शिक्षा बंद का निर्णय लिया था। प्रदेश विवि में छात्र संगठनों के आहवान पर छात्रों ने कक्षाओं में प्रवेश नहीं किया। छात्र संगठनों के पदाधिकारी सुबह ही विवि गेट पर खड़े हो गए और छात्रों से कक्षाओं का बॉयकाट करने की अपील करते रहे। छात्र नेताओं के अनुसार शिक्षा बंद पूरी तरह सफल रहा।
उल्लेखनीय है कि छात्र चुनावों को लेकर पिछले कई दिनों से विवि के कुलपति और छात्र संगठनों के बीच कशमकश चल रही है। पूर्व में कुलपति जहां चुनावों पर रोक लगाने के बयान दे चुके थे, वहीं आक्रोशित छात्र संगठनों ने एकमंच बनाकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया था। छात्र नेताओं का कहना है कि चुनावों पर प्रतिबंध लगाकर विवि प्रशासन और राज्य सरकार छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने का प्रयास कर रहे हैं। छात्र संगठनों ने चुनाव रोकने पर उग्र आंदोलन के लिए भी विवि प्रशासन को चेताया था। चुनाव बहाली की कवायद पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन और एसएफआई ने मिलकर संयुक्त समन्वय समिति का गठन किया। प्रदेश की छात्र सियासत में ऐसा पहली बार हुआ कि किसी मसले पर तीनों छात्र एकजुट हुए हों।