वीरभद्र ने मजबूरी में छोड़ा मंत्रिपद : भाजपा

शिमला।

सीडी मामले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री वीरभद्र सिंह पर आरोप तय होने व उनके केन्द्रीय मंत्रिमण्डल से त्याग पत्र देने के बाद भाजपा और कांग्रेस में जुबानी जंग तेज होती जा रही है। बीते कल पूर्व केन्द्रीय मंत्री वीरभद्र सिंह केन्द्र में मंत्री पद से त्याग पत्र देने के बाद पहली बार हिमाचल पहुंचे हैं। हिमाचल पहुंचते ही उन्होंने प्रदेश भाजपा सरकार पर जोरदार हमले किए और कहा कि उन्हें एक साजिस के तहत भाजपा की सरकार ने सीडी मामले में फंसाया है।

भाजपा ने जवाबी हमला करते हुए कहा है कि वीरभद्र सिंह ने केन्द्रीय मंत्री पद से त्याग पत्र मजबूरी में दिया है। भाजपा प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने सोमवार को शिमला में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर वीरभद्र सिंह में जरा भी नैतिकता होती तो यह सीडी उनके मुख्यमंत्री रहते ही रिलीज हुई थी। तब उन्होने त्याग पत्र क्यों नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह न्यायालय के निर्णय को भाजपा की साजिश करार दे रहे हैं जोकि सीधे-सीधे न्यायालय की अवमानना है। इस प्रकार वीरभद्र सिंह और उनके सर्मथक न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंच रहे हैं। जिसकी भाजपा निंदा करती है।

उन्होने कहा कि वीरभद्र सिंह का यह कहना गलत है कि उन्हें भाजपा ने फंसाया है। जबकि यह सबको मालुम है कि यह सीडी उनके मंत्रिमण्डल के सहयोग मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने की धर्मशाला में 2007 में जारी की थी। शर्मा ने बताया कि न्यायालय ने भी वीरभद्र सिंह को प्रथम दृष्टा दोषी माना है।

कांग्रेस हाईकमान द्वारा वीरभद्र सिंह को चुनाव प्रचार कमेटी का अध्यक्ष वनाए जाने पर रणधीर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने एक भ्रष्ट व्यकित को यह जिम्मेदारी दी है जिससे यह साफ हो गया है कि कांग्रेस भ्रष्टाचार को बुरा नहीं मानती और कांग्रेस ने भ्रष्टाचार से समझौता कर लिया है।

रणधीर शर्मा ने कहा कि भाजपा वीरभद्र सिंह के सीडी मामले पर आक्रमक रूख अपनाते हुए इसेे जनता के दरवार में ले जाएगी। आने वाले विधानसभा चुनावों में केन्द्र की कांग्रेस सरकार की मंहगाई और केन्द्र सरकार का भ्रष्टाचार मुख्य मुद्दा होगा।