प्रधानमंत्री से एएम एण्ड एएस अधिनियम में संशोधन की मांग

 शिमला।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण नियम, 2011 तथा प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल एवं अवशेष नियम, 2011 के प्रावधानों में संसोधन की मांग की है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में कहा कि अधिनियम एवं नियमों के प्रावधान बाधक प्रतीत होते हैं और ये लोगों, जिनकी धरोहर को इनके द्वारा सुरक्षित रखना है, के लिए ठीक नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि ये प्रावधान लोगों विशेषकर प्रमुख हिस्सेदारों के दैनिक जीवन में रूकावट बन रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिनियम एवं नियमों के अनुसार कोई भी नागरिक गतिविधि, जिनमें जल निकासी, स्कूल अथवा अस्पताल का निर्माण एवं रखरखाव संरक्षित स्मारक की अधिगृहित भूमि की बाहरी सीमा से सौ मीटर के अर्धव्यास में नहीं किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त, दो सौ मीटर के नियंत्रित क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण से ही स्वीकृति प्राप्त की जाएगी, जो मुरम्मत एवं जीर्णोद्वार के कुछ मामले ही स्वीकृत करेगा। हिमाचल प्रदेश में निदेशक, भाषा एवं संस्कृति को सक्षम अधिकारी अधिसूचित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि विकेन्द्रीयकरण, पहुंच एवं त्वरित राहत के मौजूदा परिप्रेक्ष्य में यह अधिनियम विपरीत दिशा में कार्य करता प्रतीत होता है, जिसमें एक केन्द्र स्तर पर केन्द्रीय प्राधिकरण और एक राज्य स्तर पर कार्य कर रहा है। प्रत्येक मामले में नागरिक सक्षम प्राधिकरण को आवेदन करता है, जो कार्यस्थल का निरीक्षण करेगा और इसके पश्चात, मामले की संस्तुति राष्ट्रीय प्राधिकरण  को देगा, जो मामले को निपटाएगा। उन्होंने कहा कि अभी तक का अनुभव यह है कि यदि संपति दस मीटर के दायरे में है तो अस्वीकृति ‘स्वाभाविक’ है।

धूमल ने प्रधानमंत्री के ध्यान में लाया कि हिमाचल प्रदेश की विशेष भौगोलिक, एतिहासिक पृष्ठभूमि के दृष्टिगत चार सौ से अधिक मंदिर हैं, जिनका धार्मिक, एतिहासिक एवं पुरातत्व महत्व है। तीन सौ मीटर का अर्धवृत समूचे शहर को दायरे में लाता है और शायद ही ऐसा क्षेत्र होगा जो किसी भी नागरिक गतिविधि के लिए इस सीमा से बाहर आता हो। मण्डी, चम्बा तथा ताबो (जहां एक हजार वर्ष पुराना बौद्ध मठ स्थापित है) को गुगल अर्थ मैप से भी देखा जा सकता है।

इससे पहले हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने 21 दिसम्बर, 2011 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य के लिए अधिनियम एवं नियमों के प्रावधानों में संशोधन किया जाए।