धूमल सरकार कर्मचारियों की हितैषी : बिंदल

शिमला, 19 जुलाई ।

हिमाचल भाजपा ने कर्मचारियों को टाइम स्केल 4-9-14 व अन्य वितीय लाभ देने के धूमल सरकार के फैसले का स्वागत किया है। प्रदेश भाजपा महामसचिव राजीव बिंदल ने आज प्रेस वार्ता में कहा कि जेसीसी की बैठक में वर्तमान सरकार ने सरकारी कर्मियों के पक्ष में ऐतिहासिक घोषणाएं की हैं, इससे कर्मचारी वर्ग को राहत मिली है। बिंदल के अनुसार सतारूढ़ भाजपा सरकार ने पिछले साढ़े चार साल के कार्यकाल के दौरान प्रदेश के हर वर्ग का समुचित विकास किया है। जेसीसी की बैठक से पहले राज्य सरकार कर्मियों को लगभग 6700 करोड़ के वितीय लाभ प्रदान कर चुकी है तथा बैठक की घोषणाओं के बाद 500 करोड़ के अतिरिक्त लाभ कर्मियों को मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि पूर्व की कांग्रेस सरकार कर्मचारी हितैषी होने का केवल दावा करती है। पांचवां वित आयोग कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान आया था। लेकिन तत्कालीन सरकार द्वारा संशोधित वेतनमान देना तो दूर, अंतरिम राहत तक कर्मचारियों को नहीं दी गई। भाजपा सरकार ने सता में आते ही 10 फीसदी अंतरिम राहत प्रदान की। कांग्रेस द्वारा वर्ष 2004 के दौरान केंद्र के साथ एक एमओयू साइन कर नौकरियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया।  अनुबंध पर भर्तियां शुरू हुईं लेकिन नियमितीकरण का प्रावधान नहीं था। इसके बाद भाजपा सरकार ने अनुबंध कर्मियों के लिए आठ साल की समय सीमा निर्धारित की, जिसे अब घटाकर 6 साल कर दिया गया।
सरकारी कर्मियों को पंजाब की तर्ज पर वितीय लाभ देने पर बिंदल ने कहा कि पंजाब ने अभी तक 40 फीसदी एरियर दिया है जबकि हिमाचल में 100 फीसदी एरियर दिया जा चुका है। उन्होंन स्पष्ट किया कि हिमाचल में पंजाब से ज्यादा वितीय लाभ प्रदान किए गए हैं।
बिंदल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने प्रदेश को आर्थिक तौर पर संकट में डाला है। कर्मचारियों व पेंशनरों से संबंधित देनदारियों का आकलन केंद्र द्वारा सही तरीके से नहीं किया गया और इसकी एवज में प्रदेश को 5 वर्षों में 1800 करोड़ का नुक्सान झेलना पड़ रहा है। केंद्र ने हिमाचल सरकार के वितीय घाटे की वास्तविक रिपोर्ट को स्वीकार करने से इंकार कर दिया, बावजूद इसके यहां कर्मचारियों को वितीय लाभ प्रदान किए गए। इसके लिए भाजपा सरकार वधाई की पात्र है।
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा उन्हें टारगेट किए जाने के सवाल पर बिंदल ने कहा कि वीरभद्र राजनीतिक आधार पर प्रतिशोध की भावना से ग्रस्त हैं। इसका उदाहरण वर्ष 2003 में देखने को मिला जब तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र ने शांतिपूर्ण विरोध कर रहे भाजपा विधायकों पर लाठीचार्ज करने का आदेश दिया था। साथ ही कांग्रेस सरकार द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं पर सैंकड़ों मामले दर्ज हुए थे।