जेबीटी प्रशिक्षुओं को सिब्बल ने नहीं दी राहत, देना होगा टीईटी

शिमला, 09 जुलाई।

टीईटी टैस्ट में छूट की मांग पर अड़े जेबीटी प्रशिक्षुओं को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल से भी निराश हाथ लगी है। सिब्बल ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत जेबीटी प्रशिक्षुओं को टीईटी टैस्ट देना अनिवार्य बताया। राज्य सरकार ने उन जेबीटी प्रशिक्षुओं को अध्यापक पात्रता परीक्षा से छूट देने का मामला केन्द्रीय मंत्री से उठाया जो जेबीटी प्रशिक्षण के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व चयनित हो गए थे।
इसके जबाव में कपिल सिब्बल ने प्रदेश सरकार को सूचित किया है कि अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने की शर्त विभिन्न उद्देश्यों से अगस्त, 2010 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आरम्भ की गई है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय मानकों को एक समान रूप से लागू करना और शिक्षण संस्थानों में अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया से गुणात्मक सुधार लाना तथा विद्यार्थियों की क्षमता कुशलता को स्तरोन्नत करना है। साथ ही इसके माध्यम से अभिभावकों व अन्य को यह सकारात्मक संदेश देना है कि सरकार अध्यापकों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रही है।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की तरह ही अन्य राज्यों में दो वर्षीय डी.एड कार्यक्रम (हिमाचल प्रदेश के जेबीटी कार्यक्रम के समकक्ष) में प्रवेश चयन परीक्षा में मैरिट के आधार पर ही किया जाता है। यहां तक की जहां यह प्रक्रिया अपनाई जाती है और जहां विद्यार्थी दो वर्षीय डी.एड कार्यक्रम उत्तीर्ण करते हैं वहां भी भावी अध्यापक नियुक्ति में अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्र्तीण करने की शर्त लागू की गई है। यह शर्त देशभर के सभी स्कूलों में लागू है।