जरूरतमंदों के लिए आशा की किरण बना मुख्यमंत्री राहत कोष

शिमला, 09 जुलाई ।

प्रदेश में मुख्यमंत्री राहत कोष एक अभियान बन गया है तथा लोग इसमें बड़चड़ कर योगदान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री राहत कोष से एक जनवरी 2008 से लेकर अब तक करीब साढ़े 23 करोड़ रूपए जरूरतमंदों को वितरित किए गए हैं। इस से करीब 12 हजार लोगों को जीवन मिला है। यह बात मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने आज यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि जब वह वर्ष 2008 में सत्ता में आए थे तो मुख्यमंत्री राहत कोष में मात्र एक करोड़ रूपए की धनराशि थी। लेकिन जब भाजपा सरकार वर्ष 2003 में सत्ता को छोड़ कर गई थी तो इस राहत कोष में 4 करोड़ रूपए की धनराशि थी। धूमल ने कहा कि जैसे वह मुख्यमंत्री बने उन्होंने लोगों से अपील की कि वह उन्हें तोफे या फूल माला देने के स्थान पर मु यमंत्री राहत कोष में अपने समर्थता के अनुसार धन जमा करे। इसका लाभ भी हुआ तथा अब महिलाएं व अन्य कई लोग हाथ में माला के स्थान पर मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए राशि जमा करवाने के लिए लिफाफे साथ लाते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में राहत कोष से 10 से 15 लाख रूपए तक की धनराशि आईजीएमसी में एडवांस में दी गई है ताकि जरूरत मंदों को समय पर इलाज मिल सकें। इस राशि को चिकित्सक उन लोगों पर खर्च कर सकते हैं जिन्हें इसकी आवश्यकता होती है। अन्य औपचारिकता बाद में पूरी की जा सकती है।

धूमल ने कहा कि जब वह विपक्ष में थे तो उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर उनके गांव के एक व्यक्ति के पुत्र के इलाज के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से धनराशि उपलब्ध करवाने के लिए पत्र लिखा था। इसको लेकर उन्होंने तीन बार पत्र लिखा लेकिन तत्कालीन मु यमंत्री ने इसको लेकर पटवारी की रिपोर्ट मंगवाई। इस दौरान उस बच्चे की मौत हो गई। लेकिन वर्तमान में जो भी सहायता मांगता है उसे तत्काल में सहायता दी जाती है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सूचना एवं जन संपर्क विभाग द्वारा बनाई गई मुख्यमंत्री राहत कोष को लेकर एक सीडी का भी विमोचन किया। इस सीडी में दर्शाया गया है कि किस प्रकार मुख्यमंत्री राहत कोष से जरूरत मंदों को लाभ हुआ है।