ओलावृष्टि प्राकृतिक आपदा में शामिल, किसानों-बागवानों को राहत

शिमला, 10 जुलाई ।

हिमाचल प्रदेश में ओलावृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी। ओलावृष्टि को आपदा सूची में शामिल किया गया है। राज्य सरकार ने  प्रकृतिक आपदा से लोगों को राहत देने के लिए हिमाचल प्रदेश आपदा प्रबंधन एवं राहत नियमावली 2012 का गठन किया है। इसमें जहां 6 नई राहतों को शामिल किया गया है। वहीं राज्य सरकार ने राहत राशि को भी बढ़ाया है। इसके अलावा बेनामी सौदों को लेकर गठित कमीशन की रिपोर्ट पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसके तहत इस रिपोर्ट के अंशों को संबंधित डीसी को आगामी कार्रवाई को भेजा गया है।  यह जानकारी आज शिमला में राजस्व मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर ने पत्रकारों को संबांधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि इस नियमावली को प्रदेश मंत्रीमंडल ने पहले ही स्वीकृति दे दी है। इस नई नियमावली के तहत राज्य सरकार ने ओलावृष्टि को इस नियमावली में शामिल किया गया है, क्योंकि प्रदेश में ओलावृष्टि से किसानों व बागवानों को भारी नुकसान होता है।  इसके अलावा प्रकृतिक आपदा से यदि किसी प्रदेश के व्यक्ति की मृत्यु बाहरी राज्यों में होती है तो उसके आश्रितों को भी राहत मेन्युअल के तहत राहत राशि दी जाएगी। अभी तक राज्य ही में होने वाली मृत्यु पर ही राहत राशि प्रदान की जाती थी। मछुआरों को उनकी नावों के आंशिक नुकसान पर 3 हजार रूपए तथा पूरी तरह से नुकसान पर 7 हजार रूपए की राहत राशि देने का प्रावधान भी इस नई नियमावली में किया गया है।

शिल्पकारों जैसे लौहार, कु हार, बढ़ई आदि को बरसात से नुकसान पर 3 हजार रूपए तथा उनके सामान के नुकसान के एवज में 3 हजार रूपए अतिरिक्त राहत राशि देने की भी व्यवस्था की गई है। यदि किसी गरीब की झौंपड़ी बरसात या अन्य प्राकृतिक आपदा के कारण ढह जाती है तो उसे 2500 रूपए की राहत राशि प्रदान की जाएगी, जबकि अभी तक ऐसा प्रावधान नहीं था। मुर्गीपालकों को नुकसान के ऐवज में प्रति परिवार 400 रूपए की राहत राशि प्रदान की जाएगी।