अंतिम दिन कलाकारों ने दर्शकों को झुमाया

शिमला, 24 जुलाई ।

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह के आखिरी दिन श्रावणी सांस्कृतिक संध्या ‘गुलदस्ता’ में प्रतिभावान कलाकारों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। विवि के गैर-शिक्षक कर्मचारियों ने जहां अपनी कला का लोहा मनवाया तो साथ ही इंडियन ऑइडल फेम कृतिका तनवर के गीतों और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गगनदीप कोटी के सितार वादन ने सभागार में सभी को मन्त्र मुग्ध कर दिया।
सुदर्शना भण्डारी की सावन पर खूबसूरत  नृत्य नाटिका ने श्रावणी सांस्कृतिक संध्या का नाम चरितार्थ कर दिया। साथ ही भूपेन्द्र नेगी के नेतृत्व में हिमाचल पुलिस ऑरकेस्ट्रा ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन भी किया और उनकी अन्तिम प्रस्तुति देश के शहीदों के नाम रही। कुलपति प्रो.एडीएन वाजपेयी ने इस मौके पर एक गीत प्रस्तुत किया।

इंडियन ऑइडल फेम कृतिका तनवर के हिमाचली लोकगीत ‘ओ मामटिया बोलो दयारामा …. के अलावा और ‘कभी शाम ढले तो मेरे दिल में आ जाना ….’ पर दर्शकों खूब थिरके। सुदर्शना भण्डारी के सावन पर एकल नृत्य ‘चूड़ी भी जिद पर आई है, पायल ने शोर मचाया अब तो आ परदेसी, सावन का महीना आया है….’ से ऐसा लगा कि सभागार के भीतर सावन के झूले पड़ गए हों।

दिनेश कुमार एवं उनके साथियों ने हिमाचली लोकगीतों और नाटियों के गुलदस्ते ने दर्शकों को रिझा दिया। प्रो. डी.डी. शर्मा की हास्य कविताओं पर खूब हंसे। संगीत विभाग की छात्रा भावन लता की गज़ल ‘मेरे हम नफज़, मेरे हम नवाज…’ ने भी दर्शकों को आनंदित किया। भरत राम के सिरमौरी लोकगीत और मदन झागटा, मीना कुमारी एवं सरला के लोकगीतों ने दर्शकों को मन्त्र मुग्ध किया।