सरकार जे.पी. सीमेंट्स से लेगी पथ कर

शिमला, 07 जून।

सरकार जे.पी. सीमेंट्स से पथ कर लेगी। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा 31 मई, 2012 को मैसर्स जय प्रकाश एसोसिएट्स पर कर लगाने के राज्य सरकार के दावे को उचित ठहराया गया था। मैसर्स जयप्रकाश एसोसिएट्स ने हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला की अर्की तहसील की ग्राम पंचायत मांगल के पिछड़े पंचायत क्षेत्र बग्गा गांव में सीमेंट उत्पादन इकाई स्थापित की थी। यह क्षेत्र ‘सी’ श्रेणी में आता है, जो राज्य सरकार की नीति के अन्तर्गत कर मुक्त जोन है।

आबकारी एवं कराधान विभाग के एक प्रवक्ता ने वीरवार को शिमला में बताया कि कंपनी ने 15 फरवरी, 2010 से यहां क्लिंकर का व्यावसायिक उत्पादन आरम्भ किया। हिमाचल प्रदेश की वर्ष 2004 की औद्योगिक नीति के अनुसार प्रदेश के कर मुक्त जोन में स्थापित की जा रही औद्योगिक इकाइयों को विभिन्न प्रोत्साहन/छूट/रियायत प्रदान की जा रही है परन्तु ये उन औद्योगिक इकाइयों को देय नहीं हैं, जो नकारात्मक इकाई की सूची में आती है।

इस अधिनियम के अन्तर्गत कर की प्रकृति प्रतिपूरक है और अधिनियम के तहत औद्योगिक इकाइयां किसी भी प्रकार की छूट की पात्र नहीं है। इसी के अनुसार आबकारी एवं कराधान विभाग ने मैसर्स जेपी एसोसिएट्स के ट्रांसपोर्टर्स द्वारा बग्गा इकाई से राज्य के बघेरी, नालागढ़ और राज्य से बाहर क्लिंकर के परिवहन पर लगभग 55 करोड़ रुपये का कर लगाया है। किन्तु कंपनी इस कर की उगाही का विरोध करती रही और विभाग से इस संबंध में स्पष्टीकरण भी मांगती रही। विभाग ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि कर उत्पादन पर नहीं लगाया गया है अपितु यह कर ट्रांसपोर्टर पर लगता है। इसलिए कंपनी का दावा गलत है।

जेपी एसोसिएटस ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में आबकारी एवं कराधान विभाग के विरूद्ध एक सिविल रिट पैटीशन दायर की जिस पर एकल बैंच ने कंपनी के पक्ष में अपना फैसला सुनाया। राज्य सरकार ने पुन: माननीय हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष उक्त निर्णय को चुनौती देते हुए ‘लैट्र्स पेटेंट अपील’ दायर की।

माननीय उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 31 मई, 2012 के अपने निर्णय में लैट्र्स पेटेंट अपील को स्वीकार किया तथा माननीय एकल न्यायाधीश द्वारा दिए गए फैसले को इस टिप्पणी के साथ निरस्त किया कि रिट पैटीशनर अर्थात मैसर्स जेपी एसोसिएट्स हिमाचल प्रदेश में सडक़ मार्ग द्वारा क्लिंकर/सीमेंट को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने, ले-जाने के मामले में कर अदायगी से छूट का पात्र नहीं है। अत: राज्य सरकार के इस दावे की मैसर्स जेपी एसोसिएट्स को परिवहन कर देना होगा, को सही माना।