प्रदेश सरकार के दो मंत्रियों ने साधा वीरभद्र सिंह पर निशाना

शिमला।

प्रदेश भाजपा सरकार के दो मंत्रियों ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री वीरभद्र सिंह पर निशाना साधते हुए कहा है कि माननीय विशेष न्यायालय शिमला द्वारा केन्द्रीय मंत्री श्री वीरभद्र सिंह के विरूद्ध आरोप फ्रेम करने के बाद इसका दोष भाजपा सरकार पर मढऩा हास्यस्पद ही नहीं बल्कि इससे लोगों का ध्यान बांटने के लिए एक सोची-समझी चाल है।

मंगलवार को शिमला से जारी एक बयान में शिक्षा मंत्री श्री ईश्वर दास धीमान और सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री रविन्द्र सिंह रवि एवं भाजपा प्रवक्ता डा. अशोक कपाहटिया ने कहा कि वीरभद्र सिंह को यह समझना चाहिए कि फैसला माननीय विशेष अदालत ने दिया है न कि भाजपा सरकार ने। उन्होंने कहा कि माननीय न्यायालय के फैसले को नकारने का मतलब है कि वीरभद्र सिंह और उनके सहयोगियों को देश की न्यायिक एवं संवैधानिक प्रक्रिया में कोई विश्वास ही नहीं है, जो यह उनके अंहकार को दर्शाता है।

धीमान, रवि तथा कपाहटिया ने कहा कि वीरभद्र सिंह को यह स्मरण होना चाहिए कि सी.डी. को वर्ष 2007 में उनकी ही सरकार के पूर्व मंत्री ने सार्वजनिक किया था, न कि भाजपा सरकार ने। उस समय प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार थी। उनको यह भी याद होना चाहिए कि इस सी.डी. पर जांच उन्होंने स्वयं मार्क की थी। उसके बाद उनके ही एक सहयोगी ने माननीय उच्च न्यायालय में ‘अप्रोच’ किया था कि ‘प्रोसिडिंग्ज़’ क्वैश की जाए और उसके प्रचार-प्रसार को रोका जाए। माननीय उच्च न्यायालय ने प्रचार-प्रसार पर तो रोक लगाई थी, न कि सी.डी. के तथ्यों की जांच पर। भाजपा सरकार जब सत्ता में आई तो तब ‘रूटींन’ में यह जांच चलती रही।