केंद्र की आर्थिक नीतियों के खिलाफ मानसून सत्र में आंदोलन : येचुरी

शिमला, 05 जून  । केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के चलते देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। जीडीपी और रूपये के मूल्य में गिरावट आ रही है। कृषि अर्थव्यवस्था की हालत खराब है। किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। दुनिया में आर्थिक मंदी के कारण आयात नहीं बढ़ रहा है। केंद्र सरकार अपनी आर्थिक नीतियों से जनता को गुमराह कर रही है। लोगों में कांग्रेसनीत यूपीए सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ आक्रोश उबल रहा है। इन सवालों पर माकपा आगामी मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर वैकल्पिक आंदोलन चलाएगी। मानसून सत्र में आर्थिक नीतियों के बदलने को लेकर धरने प्रदर्शन किए जाऐंगे।
उक्त बातें माकपा नेता व पोलित ब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी ने मंगलवार को यहां प्रेस वार्ता में कहीं। येचुरी शिमला में नगर निगम शिमला में माकपा के मेयर व डिप्टी मेयर उम्मीदवारों के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने यहां आए हैं।
येचुरी ने भाजपा को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि संसद मेें कांग्रेस की आर्थिक सुधारों की बात पर भाजपा समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को एफडीआई के मुद्दे को छोडक़र बाकी सभी आर्थिक नीतियों में भाजपा का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि दुनिया में मंदी की हालत को देखते हुए जब तक जनता में घरेलू मांग नहीं बढ़ेगी, तब तक आर्थिक विकास संभव नहीं होगा।
येचुरी ने कहा कि सरकारी निवेश और सुचारू ढांचागत निर्माण पर केंद्र सरकार को गौर करना चाहिए। सरकारी निवेश बढ़ाने से जहां एक ओर बेरोजगार तबकों को रोजगार मुहैया होगा वहीं दूसरी ओर आमदनी में भी इजाफा होगा। मगर केंद्र सरकार की मंशा औद्योगिक घरानों को मुनाफा पहुंचाने की है। केंद्र का तर्क है कि सरकार के पास निवेश करने का साधन नहीं है। जबकि सरकार कर में 5 लाख 28000 करोड़ की रियायत देकर अमीरों को सब्सिडी दे रही है।