यूपीए सरकार का अनाज प्रबन्धन कमजोर : शान्ता कुमार

दिल्ली,14 मई।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं हिमाचल से राज्य सभा सदस्य शान्ता कुमार ने कहा है कि यूपीए सरकार का अनाज प्रबन्धन अति कमजोर है, जिसके कारण 400 लाख टन से अधिक अनाज खुले में पड़ा है और भण्डारण की समस्या दिन-प्रतिदिन होती जा रही है।

राज्य सभा में भण्डारण की समस्या पर आंरभ हुई चर्चा को प्रारम्भ करते हुए शान्ता कुमार ने कहा कि देश में 680 लाख टन अनाज सरकार के पास जमा है और इस बार की फसल आने के बाद यह मात्रा 800 लाख टन से अधिक हो जाएगी।  उन्होने कहा कि भारतीय खाद्य निगम के पास कुल भण्डारण क्षमता 400 लाख टन के करीब है जबकि देश में अनाज का भण्डारण केवल खुले में ही होता हैं जिसके कारण 60,000 करोड रूपये का अनाज प्रति वर्ष खराब हो जाता है।

उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी भूख से पीडि़त लोगों को अनाज प्रदान करने का सुझाव दिया है।  उन्होने कहा कि अनाज के समुचित वितरण से भण्डारण समस्या को सुलझाया जा सकता है।

शान्ता कुमार ने कहा कि हमारे देश की आधे से अधिक जनसंख्या का सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अनाज उपलब्ध कराया जाता है, यदि इस जनसंख्या को छ: महीने का खाद्यान्न एक साथ दे दिया जाए तो साल में 176 लाख टन से अधिक खाद्यान्न का उठान हो जाता है। इस 176 लाख टन अनाज के भण्डारण पर लगभग 2 रूपये 40 पैसे प्रति किलो खर्च हैं,  यदि सरकार छ: महीने का अनाज दो रूपये किलो सस्ता दे दें और 40 पैसे स्वयं रखे तो उपभोक्ता आसानी से इस अनाज को ले सकता है और उपभोक्ता को दो रूपये किलो सस्ता अनाज मिल पाएगा।

शान्ता कुमार ने कहा कि भण्डारण की समस्या से निपटने का दूसरा विकल्प किसानों के पास उपलब्ध अनाज की खरीद किसान से करके उसे किसान के पास ही रहने दिया जाए ओर उसे इकरार करके 50 प्रतिषत अनाज का मूल्य अग्रिम दे दिया जाए तथा षेश मूल्य एवं भण्डारण का खर्चा, जो 484 रूपये प्रति क्विंटल है सरकार द्वारा अनाज उठाने पर दे दिया जाए। उन्होने कहा कि इससे भण्डारण का विकेन्द्रीकरण होगा। 
उन्होंने ने कहा कि सरकार बफर मानकों से अधिक लगभग 400 लाख टन अनाज जमा रख का जमाखोरी कर घोर उपराध कर रहा है।  उन्होने सुझाव दिया कि सरकार बफर मानकों के अनुरूप ही अनाज अपने पास रखे तथा वाकी खरीदे गए अनाज के निर्यात की व्यवस्था करे।  उन्होने कहा कि फामर्स समिति के सुझाव बासमती का निर्यात प्रारम्भ करने से 48 लाख टन चावल का निर्यात संभव हो पाया है।