जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी पर पुस्तक का विमोचन

शिमला,17 मई।

 मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने शिमला निवासी इंजीनियर जी.एस. बाजवा द्वारा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी पर लिखी पुस्तक का विमोचन किया। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी की इस व्यावहारिक पुस्तक में पहली बार प्रकृति के सबसे बहुमूल्य उपहार एवं जीवन के अमृत ‘जल’ जैसे आकर्षक विषय पर लिखा गया है।

मुख्यमंत्री ने जी.एस. बाजवा को इस व्यावहारिक पुस्तक के लेखन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि शिमला जलापूर्ति प्रणाली का विकास वर्ष 1888 में किया गया था और ऐतिहासिक रिज मैदान पर 10 लाख लीटर जल भण्डारण क्षमता का टैंक निर्मित किया गया था।

इतिहास में दर्ज जानकारी के अनुसार उस समय वायसराय का वाहन भी रिज पर स्थापित पानी के इस टैंक के ऊपर से नहीं चलाया जा सकता था। शिमला जलापूर्ति प्रणाली विश्व की चार सबसे पुरानी जलापूर्ति प्रणाली में से एक है।

पाकिस्तान के पेशावर की जलापूर्ति प्रणाली को एशिया में सर्वश्रेष्ठ आंका गया है। शिमला जलापूर्ति प्रणाली समूचे एशिया में सर्वोच्च हैड है और इसके कई विशिष्ट पहलू हैं। एतिहासिक शिमला शहर में चरट, चीढ़, गुम्मा और अश्वनी खड्ड से जलापूर्ति की जाती थी। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों द्वारा शिमला के लिए अंतिम जलापूर्ति वर्ष 1923 में पूरी की गई थी। इसमें आयातित पाइपों और अन्य उपकरणों का प्रयोग किया गया था। शिमला जलापूर्ति प्रणाली में 1400 मीटर का डायनमिक हैड प्रयोग में लाया गया है, जो एशिया में सबसे ऊंचा है।

धूमल ने कहा कि विभिन्न कार्यों के लिए जल की उपलब्धता आधुनिक योजनाकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। विश्व भर में सभ्यताओं का विकास नदियों के आसपास ही हुआ। ऐसी संभावनाएं जताई जा रही हैं कि जल अगले विश्व युद्ध का कारण बनेगा। इससे जीवन में जल की उपयोगिता का पता चलता है।