हिलोपा का भाजपा से कोई समझौता नहीं : सोफत

शिमला, 26 अप्रैल ।

हिमाचल लोक हित पार्टी के प्रवक्ता महेंद्र नाथ सोफत ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सत्तपाल सत्ती के उस बयान की कड़ी आलोचना की है, जिसमें सत्ती ने कहा था कि भाजपा की हिलोपा के साथ समझौते की बात चल रही है।

शिमला में गुरूवार को पत्रकार वार्ता में सोफत ने कहा कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती कार्यकत्र्ताओं को गुमराह करने के लिए इस तरह की ब्यानबाजी कर रहे हैं कि उनकी हिलोपा के पदाधिकारियों से बातचीत चल रही है। उन्होंने  हिलोपा की प्रदेश भाजपा के साथ किसी भी बातचीत से साफ इंकार किया। उन्होंने कहा कि हिलोपा नगर निगम शिमला के चुनावों को नहीं लड़ेगी।

सोफत ने कहा कि प्रदेश में हिलोपा को मजबूत किया जाएगा तथा वह आने वाले विधानसभा में पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ेगी तथा प्रदेश वासियों को कांग्रेस व भाजपा का विकल्प देगी। पार्टी कांग्रेस व भाजपा से बराबर दूरी बनाए रख रही है।

सत्ती के महेश्वर सिंह के पैंशन को सरैंडर करने को लेकर दिए ब्यान पर सोफत ने कहा कि यदि जनता दल व कांग्रेस से भाजपा में आए नेता अपनी पैंशन सरैंडर करते है तो महेश्वर सिंह भी अपनी पैंशन सरैंडर कर देंगे।

सोफत ने कहा कि प्रदेश में असली विपक्ष की भूमिका केंद्रीय मंत्री वीरभद्र सिंह निभा रहे हैं। बकौल महेंद्र नाथ सोफत जब वीरभद्र सिंह प्रदेश के दौरे पर आते हैं तो लगता है  कि राज्य में विपक्ष है। वह ही एक मात्र नेता है जो भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस के अन्य नेता तो अधूरे मन से विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। अभी तक कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ चार्जशीट नहीं लाई है।
अटल ए बूलैंस 108 योजना में 7.24 करोड़ रूपए के घोटाले का आरोप लगाते हुए प्रदेश सरकार से इसकी सीबीआई की जांच करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 34.87 किलोमीटर के लिए एक 108 एम्बूलैंस की लागत एक लाख 21 हजार रूपए प्रति माह है।
सोफत ने कहा कि सरकार ने कंपनी को 100 एंबूलैंस खरीदने के लिए 10 करोड़ रूपए दिए थे। कंपनी ने एंबूलैंस मध्यप्रदेश से खरीदी। इससे प्रदेश को बिक्री कर के रूप में 70 लाख का नुकसान हुआ। यदि इन्हें प्रदेश में ही खरीदा जाता तो प्रदेश को बिक्री कर के रूप में 70 लाख मिल सकते थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 13 माह में जीवीके क पनी को 7 करोड़ 24 ला ा 18 हजार 900 रूपए के लाभ दिए हैं। इस अवधि में क पनी को 29 करोड़ 84 लाख 41 हजार रूपए जारी किए गए जबकि वास्तव में राशि 22 करोड़ 60 लाख 22 हजार 100 रूपए दी जानी चाहिए थी।