हिमाचल सरकार ने रोरिक मैमोरियल ट्रस्ट के साथ विवाद को नकारा

शिमला, 25 अप्रैल।

हिमाचल सरकार ने कुल्लू के नग्गर स्थित अन्तर्राष्ट्रीय रोरिक मैमोरियल ट्रस्ट के साथ विवाद की खबरों को नकारा है। प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट संबंधी समाचार को तथ्यों के विपरीत और भ्रामक बताते हुए कहा है कि यह अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर राज्य सरकार की छवि खराब करने का प्रयास है। प्रदेश सरकार ने इस सम्बन्ध में प्रधान सचिव, भाषा एवं संस्कृति के माध्यम से रूसी दूतावास के समक्ष औपचारिक आपत्ति भी दर्ज करवाई है।

बुधवार को राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि अन्तर्राष्ट्रीय रोरिक मैमोरियल ट्रस्ट के मामलों का प्रबन्धन न्यास द्वारा किया जाता है। न्यास का गठन भारतीय न्यास अधिनियम के अन्तर्गत किया गया है और इसके दैनिक प्रबन्धन से हिमाचल सरकार का कुछ लेना देना नहीं है। न्यास के मामलों के सम्बन्ध में निर्णय ‘बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज’ द्वारा किये जाते हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि ट्रस्ट की कार्यकारी समिति की अनुशंसा पर रूसी क्यूरेटर का कार्यकाल 31 दिसम्बर, 2011 के बाद नहीं बढ़ाया गया। बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के अध्यक्ष ने रूसी क्यूरेटर के अनुबंध की समाप्ति को स्वीकृत किया, किन्तु वर्तमान क्यूरेटर ने गैर जिम्मेदाराना तरीके से कार्य करना चाहा। फिर भी जिला प्रशासन ने भारत और रूस के मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों के दृष्टिगत बेहद सम्मानजनक तरीके से कार्य किया, न कि क्यूरेटर को बेवजह तंग किया गया, जैसा कि रूसी दूतावास ने आरोप लगाया है।

प्रवक्ता ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय रोरिक मैमोरियल ट्रस्ट की कार्यकारी समिति ने नग्गर ट्रस्ट तथा इंटरनेशनल सेंटर ऑफ दी रोरिक (मोस्को) के मध्य हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के कार्यान्वयन के लिए परामर्श एवं कार्यान्वयन समिति गठित करने का निर्णय लिया है ताकि आपसी सहयोग बढ़े और नग्गर ट्रस्ट के मामलों का प्रबन्धन बेहतर तरीके से हो।
बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के अध्यक्ष ने सैद्धान्तिक रूप से राज्य सरकार के अधिकारियों, रूसी प्रतिनिधियों और संस्कृति मंत्रालय के प्रतिनिधियों के एक पैनल के गठन का निर्णय लिया है ताकि रोरिक संग्रहालय के दस्तावेजकरण एवं सौंपने के मामले पर नजर रखी जा सके। जून में अन्तर्राष्ट्रीय रोरिक मैमोरियल ट्रस्ट की स्थापना की वर्षगांठ मनाने का निर्णय भी लिया गया है। इसमें रूसी तथा भारतीय सांस्कृतिक दलों का कार्यक्रम किया जाएगा।