हिमाचल ने बीबीएमबी बिजली परियोजना में मांगी केन्द्र से अपनी हिस्सेदारी

अप्रैल 4
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने केन्द्र सरकार से भाखड़ा व्यास मैनेजमेंट बोर्ड बिजली परियोजना में हिमाचल की 7.19 फीसदी की हिस्सेदारी से 4 हजार करोड़ के लगभग की राशी जारी करने की मांग की है। मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने बुधवार को विधानसभा में वक्तव्य देते हुए बताया कि सदन के माध्यम से केन्द्र सरकार से आग्रह करता हू कि उच्चतम न्यायालय के नवीनतम निर्णय के बाद हिमाचल के दावे पर अपनी सहमति उच्चतम न्यायालय में दर्ज करवाए। ताकि हिमाचल की सारी देय राशाी उपलब्ध हो सके।
धूमल ने बताया कि पंजाब और हरियाणा सरकारें ने उच्चतम न्यायालय का निर्णय आने के बाद एक पुनर्विचार याचिका उच्चतम न्यायालय में लगा रखी थी जिसे न्यायालय ने 29 मार्च 2012 को खारिज कर दिया है। धूमल ने कहा कि इस निर्णय के बाद हिमाचल इस परियोजना में अब हिस्सेदारी वाला राज्य बन गया है। अब हिमाचल के कर्मचारी भी बीबीएमबी में प्रतिनियुक्ति पर जा सकेंगे।
धूमल ने कहा कि पंजाब पुनर्गठन एक्ट, 1966 के तहत परिसम्पत्तियों और देनदारियों से हिमाचल का आवादी के आधार पर 7.19 फीसदी हिस्सा वनता था। धूमल ने कहा कि इसी हिस्सेदारी के तहत हिमाचल वीवीएमवी विजली परियोजना में अपना हिस्सा मांग रहा है।

गेंहू में पीलेपन को रोकने के लिए सरकार ने उठाए उपयुक्त कदम

मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने प्रश्नकाल के दौरान सदन में बताया कि पिछली साल 688 करोड़ की फसल में से 5.5 करोड़ का नुकसान हुआ था। इस साल सिर्फ 224 लाख का ही नुकसान हुआ है।
प्रदेश सरकार ने गेंहू की फसल को हो रहे नुकसान और कारणों का जायजा लेने के लिए प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विभाग से विशेषज्ञों का एक दल भेजा था। इस टीम ने दिसंबर 2011 से मार्च 2012 तक 26,941 हैक्टेयर का सर्वे किया।

कांग्रेस विधायक योगराज व प्रकाश चौधरी के प्रश्र के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली साल गेंहू की फसल येलो रेस्ट के कारण खराब हुई थी। गेंहू में पीलेपन का कारण मौसम अचानक आया बदलाव था। इस दौरान टीम ने पाया कि गेंहू में 10,672 हैक्टेयर में 0-10 फीसदी बीमारी और 3,271 हैक्टेयर में 10-20 फीसदी बीमारी लगी हुई है।
कार्बन न्यूट्रल राज्य बनने की ओर

हिमाचल विधानसभा में प्रश्रकाल के दौरान मंडी के कांग्रेस विधायक अनिल कुमार व विधायक सुखविंद्र सुक्खु केे प्रश्र के जवाब में मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि कार्बन क्रैडिट की क्लीन डवैल्टपमेंट मेकेनिज्म (सीडीएम) योजना संयुक्त राष्ट्र संघ के यूनाईटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वैन्शन ऑन क्लाईमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) संस्था के तत्वाधान के अंतर्गत क्रियान्वित की जा रहीहै, जैसे वर्ष 1992 के रिओ डे जेनेरिओ श्अर्थ समिट्य में लगभग 180 राष्ट्रों ने एडॉप्ट किया था, जिसमें हमारा राष्ट्र भी स िमलित है।

इस योजना से राज्य भी लाभान्वित हो, इसके लिए हम प्रयासरत हैं। राज्य में विशेषकर जल विद्युत परियोजनाओं एवं वानिकली के क्षेत्रों में कार्बन क्रेडिटस के अर्जन की अपार संभावनाओं के दृष्टिगत सरकार ने इस कार्यक्रम अर्जित करने हेतू विभिन्न ऐजेंसियां प्रयासरत हैं। हमारा उद्देश्य राज्य के संवेदनशील हिलालयन पारिस्थितिकी के सरंक्षण के दृष्टिगत राज्य को सतत विकास की दिशा में अग्रसर करना है एवं इस दिशा में यूएनएफसीसीसी की इस योजना से भी राज्य लाभान्वित हो सके, यह प्रयास भी करना है। मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रदेश को कार्बन न्यूट्रल राज्य बनाने के लिए प्रदेश सरकार प्रयासरत है। कागर्बन क्रेडिट योजना का सीधा लाभ कसानों और पंचायतों को मिलेगा।

सेब व आम उत्पादकों को मिल रहा बीमा का लाभ

बागवानी मंत्री नरेंद्र बरागटा ने बताया कि मौसम आधारित फसल बीमा योजना का लाभ सेब व आम फल फसल के लिए बागवानों को केवल उसी स्थिति में देय होता है। जब परिस्थितियां फल फसल की पैदावार के लिए निर्धारित मापदंडों के प्रतिकूल हों, जिसके लिए अधिसूचित क्षेत्रों में स्थापित स्वचालित वेधशालाओं से मौसम संबंधी आंकड़े प्राप्त किए जाते हैं।
प्रतिकूल परिस्थियों में, सेब में अभिशीतता की अवधि में कमी, फूल खिलने की अवस्था में तापमान का उतार-चढ़ाव, फूल खिलने की अवस्था में असामयिक वर्षा, फल विकास के समय वर्षा की कमी होना शामिल है।
आम में अधिक कोहरा, फल खिलने की अवस्था में तापमान का उतार-चढ़ाव असामयिक/बेमौसमी वर्षा, फल लगने की अवस्था में तेज आंधी आना शमिल है।
उक्त योजना को लागू करने के लए विभाग की भूमिका, योजना संबंधित अधिसूचना जारी करना, प्रशिक्षण शिविरों व संचार माध्यमों से योजना का बागवानों में प्रचार-प्रसार करना, सरकार द्वारा देय प्रीमियम की 25 प्रतिशत राशि का भुगतान करना, ओलावृष्टि की अवस्था में क्षति के आंकलन हेतू गठितसमितियों में भाग लेना, योजना के अनुश्रवणहेतू संबंधित एजेंसियोंके साथ संपर्क रखना शमिल हैं।

5124  केस  है अंडर इन्वेस्टिगेशन

कांग्रेस विधायक कौल सिंह ठाकुर, कुलदीप सिंह पठानिया और राजेश धर्माणी के संयुक्त रुप से पूछे गए प्रश्र के जवाब में मु यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि 1 जनवरी, 2009 से 31 दिसंबर 2011 तक 53102 मामले विभिन्न केसों के अंतर्गत दर्ज किए गए हैं। इसमें से 39725 के चालान पेश किए गए हैं, जबकि 5124 केस अंडर इन्वेस्टिगेशन चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो केस पेंडिंग हैं, उनको सुलझाने के लिए विभाग को निर्देश दे दिए गए हैं। धूमल ने कहा कि वर्तमान सरकार में दर्ज हुए मामलों में सजा की दर पर्व की कांग्रेस सरकार से अधिक रही है। धूमल ने कहा कि पिछले तीन सालों के दौरान 2267 मामलों में आरोपी आरोप मुक्त हुए हैं। जबकि पूर्व की कांग्रेस सरकार के समय साल 2007 में 4147, 2006 में 5570 और 2005 में 6527 मामलों में आरोपी वरी हुए थे। मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि राज्य के तीन जिलों बिलासपुर, लाहौल-स्पीति और मण्ड़ी की सभी पंचायतों में मुख्यमंत्री आरोग्य पशुधन योजना के तहत पशु औषधालय खोले गए हैं। जबकि हमीरपुर की 210 पंचायते शेष वची हैं जिनमें इस साल पशु औषधालय खोल दिए जाएंगे। धूमल ने एक अन्य सवाल के जवाव में बताया कि राज्य में पीपीपी मोड के तहत 24 प्रोजेक्ट आंवटित किए हैं। जिनमें से 13 प्रोजेक्ट में आवंटित दिए गए हैं, जबकि 11 प्रोजेक्ट पर निविदां की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।