फुलबैरी पर दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय सम्मलेन संपन्न

शिमला, 29 अप्रैल।

भारतीय त्वचा विज्ञान समिति (डरमेटोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया) द्वारा आयोजित विटिलिगो अकादमी ऑफ इंडिया की पहली वार्षिक बैठक तथा द्वितीय ‘विटलिकान’ पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन रविवार को शिमला में सम्पन्न हो गया। सम्मेलन का उद्घाटन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. राजीव बिंदल ने किया।

उन्होंने इस अवसर पर कहा कि इस रोग की स्थायी प्रवृत्ति, लम्बा उपचार, प्रभावी उपचार की कमी तथा रोग की अप्रत्याशित प्रक्रिया के कारण फुलबैरी (सफेद दाग) से पीडि़त रोगी अक्सर निरूत्साहित हो जाते हैं। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि इस रोग के मनोवैज्ञानिक घटकों से निपटने और रोग की पहचान कर बेहतर उपचार को सुनिश्चित बनाया जाये, जिसके लिए सामाजिक जागरूकता महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि फुलबैरी के उपचार से सम्बन्धित विभिन्न मामलों में राय विकसित करने की आवश्यकता है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इस रोग से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए इस क्षेत्र में कार्य कर रही विभिन्न अंतरराष्ट्रीय शोध समितियों एवं विशेषज्ञों के विचारों का आदान-प्रदान किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, विभिन्न मंचों से समन्वय स्थापित कर सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से लोगों में जागरूकता लाने की आवश्यकता पर बल दिया।

डा. मोरोपिकार्डो ने उद्घाटन सत्र में ‘विटिलिगो इज़ पासिबल ऑटो-इनफलेमेट्री डिज़ीज’ पर अपना प्रस्तुतीकरण दिया। डा. खालिद ऐजिडीन, डा. सलाफिया एनटोनियों तथा डा. एस.गुप्ता ने भी इस महत्वपूर्ण विषय पर अपने शोध पत्र पढ़े।
भारत तथा विदेशों से आये 250 प्रतिभागियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया तथा विभिन्न विषयों पर अपने विचार सांझा किये।