चुनावी साल में कांग्रेस की गुटबाजी पर हाईकमान की चुप्पी

शिमला, 12 अप्रैल।

विधानसभा चुनावों के नजदीक आते ही कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व की लड़ाई भी गहराती जा रही है। मुख्यमंत्री बनने की चाहत पाले कई दिग्गज नेताओं की आपसी खींचतान के जगजाहिर होने के बावजूद हाईकमान ने इस मसले पर चुप्पी साध रखी है। हिमाचल में दिग्गज नेता व पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान केंद्रीय मंत्री वीरभद्र सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष ठाकुर कौल सिंह के बीच जारी वाकयुद्ध से निश्चित तौर पर हाईकमान पेशापेश में है। अभी तक राज्य में कांग्रेसी नेता जनता के बीच पार्टी की बात एकस्वर में रखने के बजाय व्यक्तिगत बयानबाजियों में ज्यादातर उलझे हैं।

वीरभद्र सिंह व कौल सिंह के बयानबाजी को लेकर अभी तक केंद्रीय स्तर पर किसी भी नेता की नसीहत नहीं मिली है। वीरभद्र सिंह जहां प्रदेश में अपनी जमीनी पकड़ का कई मर्तबा एहसास करवाकर खुद को समय रहते मुख्यमंत्री घोषित करने की बात कर चुके हैं। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष कौल सिंह का वक्तव्य कि कोई भी कद्दावर नेता पार्टी से बड़ा नहीं हो सकता। इससे साफ है कि कांग्रेस में वर्तमान में पार्टी प्राथमिकता से परे अहम की लड़ाई जोरों पर है।

हाल के दिनों में प्रदेश भाजपा के बागी नेताओं के आरोपों द्वारा उत्पन्न हुई स्थिति को भांपते हुए पार्टी हाईकमान ने राष्ट्रीय महासचिव जगत प्रकाश नड्डा व सहप्रभारी श्याम जाजू के संयुक्त दौरे से मामले को शांत करवाया था। प्रदेश भाजपा के दखल के बाद सांसद राजन सुशांत को भी बाहर का रास्ता दिखाया गया था। मगर कांग्रेसी नेताओं के बीच हो रहे अंतकलह में कांग्रेस हाईकमान की खामोशी हैरान करने वाली है।