रावत की बगावत ठंडी करने की कोशिश

नई दिल्ली, [राजकिशोर]। हलक में अटके उत्ताराखंड विवाद में फजीहत कराने के बाद काग्रेस ने अब नया दाव खेला है। विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटाने के फैसले पर अडिग काग्रेस ने बगावती हरीश रावत और उनके समर्थकों को सम्मानजनक रास्ता देने के संकेत दिए हैं। रावत को कैबिनेट मंत्री बनाकर प्रोन्नत किए जाने और उत्ताराखंड सरकार में उनके समर्थकों की मंत्रिपरिषद में ज्यादा भागीदारी के रास्ते निकाले जा रहे हैं। काग्रेस आलाकमान के इस रुख के बाद रावत बुधवार से फिर संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेंगे। टिहरी से सासद विजय बहुगुणा ने उत्ताराखंड के सीएम पद की शपथ ले ली है।

किसी विधायक को ही मुख्यमंत्री बनाने के नाम पर कटे पत्तो के बाद सासद विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाने के फैसले के खिलाफ हरीश रावत मुख्यमंत्री सोनिया गाधी को पत्र लिखकर संसद नहीं गए, तो उनके 17 समर्थक विधायकों ने देहरादून में शपथग्रहण समारोह का बहिष्कार किया। रावत ने सोनिया को लिखे पत्र में कहा कि अगर मुझ पर सबको साथ लेकर चलने का भरोसा नहीं है, तो मैं सभी पदों से इस्तीफा देकर सामान्य कार्यकर्ता की तरह काम करूंगा। इतना ही नहीं उन्होंने उत्ताराखंड के प्रभारी महासचिव चौधरी बीरेंद्र सिंह पर उत्ताराखंड की गलत तस्वीर पेश करने का आरोप भी लगाया। रावत की भाजपा के साथ बातचीत और उत्ताराखंड में पतली हालत को देखकर काग्रेस के प्रबंधक हर मोर्चे पर सक्रिय हुए। काग्रेस नेतृत्व भी यह बात मान रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम से रावत के साथ अन्याय का भाव गहराया है। इसलिए काग्रेस उनके प्रति नरम रुख ही अपनाए रही। रावत के सामने दिक्कत थी कि उनके एक दर्जन से ज्यादा समर्थक विधायक कुछ मानने को तैयार नहीं थे। सूत्रों के मुताबिक, सोमवार-मंगलवार देर रात को उन विधायकों ने रावत से साफ कह दिया कि अगर उन्होंने समझौता किया तो वह हमेशा के लिए उनका साथ छोड़ देंगे।

सूत्रों के मुताबिक पहले किसी भी कीमत पर बहुगुणा को सीएम नहीं बनने देने पर आमादा रावत खेमे ने काग्रेस नेतृत्व की पहल के बाद अपना रुख नरम किया है। अब काग्रेस आलाकमान को संदेश भेजा गया है कि बहुगुणा को मुख्यमंत्री बना दिया कोई बात नहीं, लेकिन अब राजनीतिक हैसियत हमें मिले। सूत्रों के मुताबिक रावत खेमे ने अपने लिए उत्ताराखंड में 70 फीसदी कैबिनेट की जगह मागी है। उत्ताराखंड की मौजूदा स्थिति में ये शर्ते मानना काग्रेस के लिए काफी कठिन है, लेकिन यह रास्ता निकालने के लिए काग्रेस के वार रूम में देर रात तक गुलाम नबी आजाद की दूसरे नेताओं से बैठक चलती रही। काग्रेस के इस रुख के बाद ही रावत ने अपनी चुप्पी तोड़ी और भाजपा के साथ जाने के कयासों को खारिज करते हुए कहा कि मैं काग्रेस की बालिका-वधु हूं, मुझे न्याय चाहिए। रावत यह जताना नहीं भूले कि देहरादून में शपथ के समय काग्रेस के 32 विधायकों में से 17 विधायकों का बहिष्कार करना यह जताने के लिए काफी है कि मेरे साथ कितने विधायक हैं।