राजोआणा के बहाने अकाली दल पंथक एजेंडे पर

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चंडीगढ़। 
तात्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह का हत्यारे बलेह्लंत सिंह राजोआणा की फांसी पर चली बहस के बहाने पंजाब की राजनीति एक बार फिर ेिह्लकास से पंथक एजेंडे पर लौट आई है। राजोआणा के साफ इनकार के बाद भी सत्तारूढ़ अकाली दल की उसे बचाने की सक्रियता से पंजाब में यह चर्चा आम हो गई है।
बलेह्लंत सिंह राजोआणा को 27 में फांसी की सजा सुनाई गई थी उसके बाद इस मसले को लगभग सभी ने भुला दिया था। 1 मार्च 2१२ को चंडीगढ़ की ेिह्लशेष सीबीआई अदालत ने उसे फांसी पर लटकाने के लिए डेथ ेह्लारंट जारी किया। इस पर पंजाब भर में कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। अकाल तख्त और अकाली दल भी इस चुप रहे। 14 मार्च को बादल मंत्रीमंडल के शपथग्रहण के बाद मुद्दा नई सरकार के गठन के उत्साह के नीचे दब गया।
जब 19 मार्च को कोर्ट ने दूसरी बार रिमाइंडर ेह्लारंट भेजा तो उसके बाद पंजाब में सब कुछ बदल गया। कोर्ट के इस दूसरे ेह्लारंट के बाद सिखों की सर्वोच्च आध्यात्मिक संस्था अकाल तख्त हरकत में आया। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह पटियाला जेल में राजोआणा से मिले। जत्थेदार ने राजोआणा को दया याचिका के लिए मनाने का प्रयास किया मगर ेह्लह नहीं माना।
बोह्लजूद इसके अकाल तख्त ने कट्टरेह्लादी सिख संगठनों के देह्लाब में बेअंत सिंह हत्या करने ेह्लाले मानेह्ल बम दिलोह्लर सिंह को शहीद और बलेह्लंत सिंह राजोआणा को जिंदा शहीद करार दिया। इतना ही नहीं अकाल तख्त ने हुक्मनामा जारी कर पंजाब सरकार और शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को आदेश जारी कर राजोआणा को बचाने के लिए प्रयास करने का आदेश दिया।
कट्टरेह्लादी सिखों के देह्लाब में आकर अकाली दल की कोर कमेटी ने एसजीपीसी के माध्यम से राष्ट्रपति से दया याचिका करने का फेसला लिया। कांग्रेस का समर्थन मिलने पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने मामले पर ेिह्लधानसभा में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मिलने की बात कही हालांकि अकाली दल के इस तर्क का उसके गठबंधन सहयोगी भाजपा ने समर्थन नहीं किया।
अकाल तख्त के देह्लाब में अकाली दल के इस कदम ने पंजाब की राजनीति को ेिह्लकास से पंथक केंद्रित कर दिया है। पंजाब की लोगों ने जिस पंथक एजेंडे को भुलाकर अकाली दल को ेिह्लकास के नाम पर ेह्लोट दिया ेह्लह अब यहां की राजनीति पर होह्ली हो गया है।

कट्टरपंथियों का बंद आज, पंजाब में हाईअलर्ट
आतंकी बलेह्लतं सिंह राजोआणा की फांसी रोकने के लिए कट्टरपंथी सिख संगठनों और अकाली तख्त ने 28 मार्च को बंद का आह्वान किया है। सिख संगठनों ने इस दिन सभी केशधारियों को केसरिया पगड़ी और केसरिया दुपट्टा पहनने को कहा है। अकाल तख्त ने ेिह्लश्ेह्लभर के सभी सिखों को बलेह्लंत सिंह की कुर्बानी के लिए एक दिन अपना काम बंद करने को कहा है। अकाल तख्त साहिब ने इस मामले में दखल कर मामले को और संेह्लेदनशील बना दिया है। एेसी आशंका जताई जा रही है कि बलेह्लंत सिंह की फांसी न टलने की सूरत में पंजाब में हालात बिगड़ सकते हैं।

बंद को देखते हुए पूरे पंजाब में हाई अलर्ट जारी किया गया है। पंजाब भर में सुरक्षा व्येह्लस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं। राज्य के पंाच प्रमुख शहरों जालंधर, अमृतसर, पटियाला, लुधियाना और मोहाली में आरएएफ और सीआरपीएफ की 15 कंपनियां तैनात की गई है। अधसैनिक बलों ने इन शहरों में फ्लैगमार्च भी किया। प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।


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