रतिया क्षेत्र की तिल्लेदार पंजाबी जूती की विदेशों में भी धाक

चंडीगढ़।
पुराने जमाने की तरह आज भी पंजाबी जूती अपनी पूरी चमक बिखेर रही है। जिला फतेहाबाद के रतिया क्षेत्र की पंजाबी जूती की मंाग विदेशों में भी दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। रतिया क्षेत्र के लोग जो कनाडा, अमेरिका, जापान, जर्मनी, इटली आदि देशों में रहते हैं, वे ज्यादातर विदेशी दोस्तों को पंजाबी जूती ले जाकर देते है। यह जानकर अति हर्ष होगा, कि इंसान के स्वास्थ्य के लिए बड़ी लाभदायक होती है, वहीं चिकित्सकों के अनुसार बल्ड प्रैशर व शूगर जैसी कई बिमारियों के लिए ये जूती फायदेमंद साबित होती है, क्योंकि जूती पहनने से एड़ी के नीचे बढ़ी हुई चमड़ी इंसान के शरीर में अपने आप एक्यूपै्रशर का काम करती है। जिससे व्यक्ति के शरीर का बल्ड प्रैशर सामान्य रहता है, इतना ही नहीं अपनी अलग चमक बिखेरने वाली तिल्लेदार पंजाबी जूती पंजाब राज्य के सीमा पर बसे हरियाणा के रतिया शहर में बनने वाली ये जूती विदेशों में भी मशहूर है। विवाह के समय तो इन पंजाबी जूतियां खरीदने वालों की दूकानों पर काफी भीड़ देखने को मिलती है और खरीददार इन पंजाबी जूतियों में नए-नए डिजाइनों की मांग करते है।
रतिया के पाल जूती मैकरज के मालिक बताते हैं कि पूरानें समय में राजा-महाराजाओं की ये विशेष पंसद होती थी। बदलते फैशन के दौर में कई नामी कंपनियां अपने उत्पाद उपलब्ध करवा रही है व भिन्न-भिन्न आकर्षक मुद्राओं में ये बाजार में उतारी हुई है। दिसौदिया जूती मैकरज के मालिक बताते है कि रतिया की पंजाबी तिल्लेदार जूती अपना एक अलग स्थान बनाती जा रही है। आजकल के दुल्हों व दुल्हनों की पैरो की शान रखने वाली ये जूतियां जहां जूती बनाने वाले कारीगरों के व्यवसाय को बढ़ावा दे रही है, वहीं दिन-प्रतिदिन इनकी मांग बड़ती जा रही है। विशेषकर तिल्ले की कढ़ाई वाली जूती इन सभी जूतियों में अलग पहचान बनाए हुए है। रतिया क्षेत्र में इस व्यवसाय से 25० के लगभग कारीगर जुडे हुए हैं जो प्रतिदिन अपनी मेहनत से 5०0 से 8०0 रूपए तक की कमाई करते हैं। इन जूतियों की मांग बढऩे के कारण जूती व्यवसाय में काफी इजाफा हुआ है तथा इस व्यवसाय में लगे हुए लोगों का जीवन स्तर ऊंचा उठा है।