मुसाफिरों की इन 5 उम्‍मीदों को पूरा कर पाएंगे त्रिवेदी?

नई दिल्ली. रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी आज लोकसभा में रेल बजट पेश करेंगे। पहली बार रेल बजट पेश कर रहे त्रिवेदी का यह कड़ा इम्तिहान है। देश भर की जनता की रेल मंत्री से कई उम्‍मीदे हैं।
रेल मु‍साफिर सबसे पहले तो यह जानना चाहेंगे कि इस बार भी रेल किराया बढ़ेगा या नहीं। सूत्रों के मुताबिक यात्री किराया बढऩे के आसार बेहद कम हैं। माल भाड़ा बजट से ठीक पहले करीब 22 फीसदी बढ़ा दिया गया है। इसमें भी बढ़ोतरी की गुंजाइश कम ही है।

मुसाफिरों को सबसे अधिक चिंता सफर के दौरान अपनीसुरक्षाको लेकर रहती है। ऐसे में रेल मंत्री रेलवे की सुरक्षा के लिए किन कदमों का ऐलान करते हैं, इस पर भी नजर होगी। रेलवे संरक्षाके लिए काकोडकर समिति की रिपोर्ट के सेफ्टी-सेस लगाने के सुझाव पर अमल के लिए इसका भार यात्रियों पर डाला जाएगा या नहीं, इस पर भी नजर रहेगी। इसके लिए पांच हजार करोड़ रुपए का इंतजाम किया जाना है।

रेलवे में मेट्रो की तर्ज पर सिग्नलिंग एंड टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम लगाने की घोषणा भी हो सकती है। राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनें भले ही अपनी अधिकतम रफ्तार 120 किमी प्रति घंटा से नहीं चल रही हों, लेकिन यात्रियों को लुभाने के लिए इसी ट्रैक पर ज्यादा रफ्तार वाली कुछ ट्रेनों की घोषणा की जा सकती है।

रेल मंत्रालय ने एसी क्लास में पहचान पत्र रखने, तत्काल बुकिंग की अवधि कम करने, ऑनलाइन बुकिंग में एजेंटों का समय तय करने जैसे कई कदम उठाए हैं। इसके बावजूद यात्री टिकट वेटिंग में होने और कालाबाजारीकी शिकायत कर रहे हैं। वेटिंग लिस्ट खत्म करने के लिए रेल मंत्री ने कुछ समय पहले ऐलान किया था। लेकिन कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी है।

रेलों में साफ-सफाईकी हालत अच्‍छी नहीं है। मौजूदा टॉयलेटों के कारण पटरियों के रखरखाव पर असर पड़ रहा है। पांच साल के अंदर सभी 43 हजार कोच में ग्रीन टॉइलेट लगाने का प्लान है। टोक्‍यो रेलवे स्टेशन पर 20 प्लैटफॉर्मों से 3000 ट्रेनों को संचालन होता है, जबकि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 16 प्लैटफॉर्मों से महज 300 ट्रेनों का, लेकिन यह गंदगी और अव्यवस्थाओं के बीच।

ये हैं चुनौतियां 

दिनेश त्रिवेदी पर जहां रेलवे की माली हालत को दुरुस्त करने का दबाव है, वहीं डेढ़ करोड़ रेल यात्रियों की उम्मीदों पर खरा उतरना है। उन्हें रेलकर्मियों को भी बेहतर मैसेज देना होगा। इन सबके बीच अपनी नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मूड को ठीक रखने की चुनौती भी उनके सामने है। दिनेश त्रिवेदी को इसका अंदाजा भी है शायद।

मंगलवार को जब वे पत्रकारों से रू-ब-रू हुए तो ज्यादातर समय खामोश रहे। एक शब्द से तिल का ताड़ न बने, लिहाजा उन्होंने सवालों की बौछारों के बीच चुप रहना ही बेहतर समझा। रेल बजट के ब्रीफकेस के साथ राज्यमंत्रियों के साथ रेलमंत्री ने मुस्कराते हुए पोज देने की परंपरा का निर्वाह किया। फिर संजीदा हो गए। असल में विषम आर्थिक परिस्थिति में उन्हें खुशनुमा रेल बजट पेश करना है। माली हालत खराब होने की वजह से दुनिया भर की परिवहन बिरादरी व बड़े व्यावसायिक घरानों की नजर रेल बजट पर है।