फांसी पर सियासत: राष्ट्रपति से आंतकी को बचाने की गुहार करेगी पंजाब सरकार

भाजपा को मनाने में अकाली नाकाम, कांग्रेस ने कहा न हो सियासत

चंडीगढ़।
पंजाब में तात्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे आतंकी बलेह्लंत सिंह राजोआणा की फांसी पर सियासत गरमा गई है।पंजाब सरकार और शिरोमणी गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अकाल तख्त और कट्टरेह्लादी धार्मिक सिख संगठनों की मांग पर राष्ट्रपति से तात्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे आंतकी बलेह्लंत सिंह राजोआणा को बचाने की गुहार लगाएंगी। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सोमेह्लार को इस ेिह्लषय पर ेिह्लधानसभा में प्रस्तोह्ल पेश करेंगे। ेिह्लधानसभा से प्रस्तोह्ल पारित कर उसे राष्ट्रपति को भेजा जाएगा। यह फैसला रेिह्लेह्लार देर शाम चंडीगढ़ में हुई अकाली दल और एसजीपीसी की बैठक में लिया गया। इससे पहले शिरोमणी अकाली दल की कोर कमेटी में भी सहमति बनाई गई कि प्रस्तोह्ल को ेिह्लधानसभा में सोमेह्लार को ही पारित करेह्लाने की कोशिश की जाएगी। इससे पहले रेिह्लेह्लार को चंढीगढ़ में भाजपा और अकाली दल की बैठक हुई। भाजपा ने इस मसले पर सरकार का साथ देने से इनकार कर दिया।

कट्टरपंथी सिख संगठन फांसी माफ कर उसे रिहा करने की मांग पर प्रदेशभर में ेिह्लरोध प्रदर्शन कर रहे है। कुछ पंथक संगठनों ने सरकार को इसके गंभीर नजीते भुगतने की धमकी तक दे डाली है। कट्टरपंथी सिख संगठनों के आगे झुकते हुए शिरोमणी अकाली दल इस मसले पर नरम रुख अख्तियार कर चुका है जबकि उसकी गठबंधन सहयोगी भाजपा इससे इत्तेफाक नहीं रखती। भाजपा ने इस मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है। अकाली दल ने भाजपा को मनाने का प्रयास किया ताकि मामले को पंजाब सरकार की ओर से राष्ट्रपति के समक्ष उठाया जा सके। सत्तारूढ़ अकाली-भाजपा गठबंधन में फांसी पर एक राय न बनने से पंजाब सरकार असमंजस में पड़ गई है।
ेिह्लपक्षी दल कांग्रेस ने इस मसले पर सियासत न करने की बात कही है। ेिह्लपक्ष के नेता सुनील जाखड़ ने कहा कि कानून सबके लिए एक समान है और कानून को अपना काम करने देना चाहिए।
शुक्रवार को श्री अकालतख्त साहिब से मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, एसजीपीसी प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ और शिरोमणि अकाली दल प्रधान सुखबीर सिंह बादल को आदेश दिया गया था कि वे इस फांसी को टालने के लिए राष्ट्रपति से मिलें।
उधर, सिख संगठनों ने 28 मार्च को पंजाब बंद की तैयारियां कर ली हैं। एक शीर्ष नेता ने बताया कि केसरी दुपट्टों और पगडिय़ों का बहुत बड़ा ऑर्डर दिया गया है। इस दिन पंजाब के सिख केसरी पगडिय़ां और औरतें दुपट्टे पहनकर अपना विरोध प्रदर्शन करेंगी।

सिख कौम पर हमला: पंच प्रधानी
इसी बीच अकाली दल पंच प्रधानी ने अकाल तख्त को पत्र लिखा है कि ये निजी नहीं बल्कि सिख कौम पर सीधा आक्रमण है। केंद्र सरकार दोहरे मापदंड अपना रही है जिसके परिणाम गंभीर होंगे। साथ ही पंच प्रधानी के प्रधान दलजीत सिंह बिट्टू ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे राज्यपाल को कहें कि वे संविधान की धारा 16१ का प्रयोग करते हुए सजा को माफ करने में सहयोग दें।

सिखों से धोखा: मक्कड़
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जत्थेदार अवतार अेह्लतार सिंह मक्कड़ ने कहा कि एक दिन में कुछ भी नहीं होता और अब तो जो करना है वह सरकार को ही करना है। उन्होंने कहा कि सिखों के साथ हमेशा धोखा ही होता आया है, एक तरफ ग्राहम स्टेंज के कातिल दारा सिंह को माफ कर दिया जाता है तो दूसरी तरफ 34 हत्याएं करने वाले किशोरी लाल, जिसे सात फांसियों की सजा सुनाई गई थी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया था।

फांसी पर सस्पेंस: पटियाला जेल ने फिर लौटाया डैथ ेह्लारंट
पटियाला जेल में राजोआणा की फांसी पर सस्पेंस बना हुआ है। 3१ मार्च को बलवंत सिंह राजोआणा को फांसी देने से पटियाला जेल अधीक्षक ने इनकार कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शालिनी सिंह को भेजे पत्र में जेल अधीक्षक ने कहा है कि बलेह्लतं को चंडीगढ़ की बुडैल जेल से प्रशासकीय आधार पर पटियाला भेजा था। उस पर मामला चंडीगढ़ में चला था और चंडीगढ़ की अदालत ने उसे सजा सुनाई है। जेल अधिक्षक ने सुप्रीम कोर्ट में चले हरबंस सिंह बनाम स्टेट ऑफ यूपी केस का उदाहरण दिया है। बेअंत सिंह हत्याकांड में सहआरोपी जगतार सिंह हवारा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। फैसले से पूर्व यदि राजोआणा को फांसी दे दी जाती है और हवारा की सजा बदल जाती है तो मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।