कालेज की छात्राओं में रक्त की कमी

रोहतक।
कालेजों में पढऩे वाली छात्राएं एनीमिया से ग्रस्त मिल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इस पर चिंता जताते हुए आइरन की गोलियां बांटने व जागरूक करने का अभियान चलाया है।
प्रदेश स्तर पर चली इस योजना के तहत रोहतक जिला के कालेजों में सर्वे किया गया तो 5० फीसदी से अधिक छात्राओं में अत्यधिक रक्त की कमी पाई गई। मजेदार पहलू यह है कि इनमें से 6० फीसदी छात्राओं के पास मोबाइल फोन मिला जिस पर वे प्रति माह 3०0 से 1०0० रुपए खर्च कर रही हैं।
कालेज में पढऩे वाली छात्राओं को जागरूक माना जाता है लेकिन स्वास्थ्य के मामले में ऐसा नहीं मिला। डिप्टी सिविल सर्जन डा. कुलदीप ने बताया कि एनीमिया जांचने के लिए खास तकनीक अपनाई जा रही है। एचबी१1 को स्टैंडर्ड प्वाइंट माना गया है। 4० प्रतिशत ऐसी छात्राएं भी मिली हैं जिनका एचबी 1१ या उससे ज्यादा है लेकिन उनमें आइरन की कमी है। उन्होंने बताया आइरन की कमी से शरीर में अनेक रोग पैदा हो जाते हैं। पढ़ाई में मन न लगना व हर समय उदासी छाना इसके मुख्य व प्राथमिक लक्षण हैं।
खानपान में बदलाव की जरूरत:
डा. कुलदीप ने बताया कि केवल गेहूं की रोटियों से आइरन की पूर्ति नहीं होती। खाने में बदलाव की जरूरत है। कालेजों में आइरन की गोलियां वितरित की जा रही हैं। अगर किसी छात्रा को इसके खाने से एसीडीटी की शिकायत होती है तो वे खाने के बीच में इन गोलियों का सेवन कर सकती हैं।