आतंकी की फांसी पर पंजाब में तनाव

कट्टरपंथियों के विरोध प्रदर्शन में लगे खालिस्तान जिंदाबाद  के नारे
चंडीगढ़।
तात्कालीन बेअंत सिंह के हत्यारे आतंकी राजोआणा की फांसी को लेकर पंजाब में तनोह्ल बढ़ गया है। फांसी की सजा माफी को लेकर चलाए जा रहे ेिह्लरोध प्रदर्शन की आड़ में सिख कट्टरपंथी सक्रिय हो गए हैं। पंजाब में चल रहे ेिह्लरोध प्रदर्शनों में सिख कट्टरपंथी खुलेआम खालिस्तान जिंदाबाद के नारे बुलंद कर रहे हैं। इतना ही नहींं कट्टरपंथी राजोआणा को फांसी होने की सूरत में गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी भी दे रहे हैं। खुफिया एजेंसियां कट्टरपंथी संगठनों के ेिह्लरोध प्रदर्शनों पर नजर रखे हुए है। एेसी सूचनाएं मिल रही हैं कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल प्रदर्शनकारियों को उकसाने का काम कर सकता है। एजेंसियां भारत ेिह्लरोधी गतिेिह्लधियों में शामिल लोगों की पहचान करने में जुट गई है।
शिरोमणि अकाली दल पंज प्रधानी और अन्य जत्थेबंदियों की ओर से सोमेह्लार को मोहाली में विशाल मार्च निकाला गया जिसमें खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए। इस मौके पर लोग बलवंत सिंह राजोआणा की फोटो लेकर गुरुद्वारा अंब साहिब में पहुंचे और वहां से मार्च में हिस्सा लिया। मार्च में काफी संख्या में बच्चे ,बुजुर्ग और महिलाएं शामिल थी।
विभिन्न सिख जत्थेबंदियों की ओर से बलवंत सिंह राजोआणा की फांसी की सजा माफ करने को लेकर आज निकाले गए सिमरन मार्च में पीले झंडे और राजोआणा की फोटो के साथ लोगों ने गुरुद्वारा अंब साहिब से फेज 7 लाइट प्वाइंटों तक पैदल मार्च किए। मार्च में शामिल जतिंदरपाल सिंह जेपी ने कहा राजोआणा की फांसी की सजा माफ करने को लेकर एक पत्र राष्ट्रपति को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ दिल्ली में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख कत्लेआम के दोषियों को पकड़ा नहीं गया है और दूसरी ओर सिखों को फांसी पर चढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजोआणा को फांसी की सजा को माफ किया जाए जिससे पंजाब में फिर से माहौल खराब न हो।

पंजाब में स्थिति तनोह्लपूर्ण, सुरक्षाबल तैनात
तात्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में 3१ मार्च को बलवंत सिंह राजोआणा को दी जाने वाली फांसी के मद्देनजर पूरे पंजाब में सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए है। राज्य में शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए हर तरह से कदम उठाए जा रहे है। सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद करने को लेकर भारी पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है। पंजाब के डीजीपी सुमेध सैनी के दिए गए निर्देशों के तहत राज्य में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। पटियाला, मोहाली, अमृतसर और जालंधर में अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं। इन शहरों में सुरक्षा के लिए डीएसपी और एसपी को लगाया गया है ताकि राजोआणा फांसी मामले में किसी तरह की कोई गड़बड़ी न हो।
कानून व्येह्लस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कर्मियों के साथ-साथ कमांडोज को भी लगाया गया है। पुलिस की ओर से इन शहरों में फ्लैग मार्च भी निकाला गया है। दंगा नियंत्रण वाहन और अन्य वाहनों को गश्त पर लगाया गया है। राज्य के मंदिराों में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी में तैनात किए गए हैं। मामले की जानकारी लेने के लिए एसएसपी को खुद कमांडोज और सुरक्षा में लगे जवानों से मिलने का आदेश दिए गए हैं।

सीबीआई ने कोर्ट में किया सजा टालने का ेिह्लरोध
तात्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड के अभियुक्त आतंकी बलेह्लंत सिंह राजोआणा की फांसी पर बने गतिरोध के बीच सोमेह्लार को सीबीआई ने चंडीगढ़ की अदालत में आतंकी राजोआणा की सजा को टालने का ेिह्लरोध किया। सीबीआई ने अतिरिक्त सेशन जज शालिनी एस नागपाल की अदालत में पटियाला के जेल अधिक्षक एसएल जाखड़ की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि फांसी टालने का अब कोई मतलब नहीं है। जेल अधीक्षक ने अदालत में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या चंडीगढ़ में हुई थी इसलिए राजोआणा को फांसी देना पटियाला जेल के क्षेत्राधिकार में नहीं है।
इस पर सीबीआई के वकील ने आठ जनवरी 2०१0 के उस एग्रीमेंट का हवाला दिया जिसमें तत्कालीन आईजी ने कहा था कि राजोआणा को पटियाला शिफ्ट कर दिया जाए। साथ ही सीबीआई ने अदालत में कहा के जेल अधीक्षक पटियाला को ये तय नहीं करना है कि फांसी कहां दी जानी है। क्षेत्राधिकार का काम सरकार का है इसलिए ये सरकार को तय करना है न कि जेल अधीक्षक को। सीबीआई की ओर से राजन मल्होत्रा अदालत में पेश हुए।
इस मामले में पंजाब सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अनूप इंद्रसिंह ग्रेवाल व जिला अटार्नी मोहाली विजय सिंगला भी अदालत में पेश हुए और सजा को टालने के लिए से दलील दी कि इस मामले में कहीं कोई और याचिका लंबित तो नहीं है ये तय कर लिया जाए। क्योंकि हत्याकांड में सह आरोपी के मामले अदालतों में लंबित है। सीबीआई ने इन दलीलों का भी विरोध किया और अपना पक्ष रखते हुए कहा कि राजोआणा से संबंधित कोई भी याचिका कहीं भी लंबित नहीं है। अदालत ने फैसला मंगलवार तक सुरक्षित रख लिया है।

राष्टपति और प्रधानमंत्री से मिलेंगे मुख्यमंत्री
पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने विधानसभा को राजोआणा को फांसी के मामले पर पंजाब में पैदा हो गए हालातों से अवगत कराया। बादल ने कहा कि जिस तरह की स्थितियां पैदा हो गई ऐसे में फांसी नहीं दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने पंजाब विधानसभा में कहा कि तात्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में फांसी की सजा पाए आतंकी बलवंत सिंह राजोआणा की सजा को रुकवाने के लिए राष्ट्रपति प्रतिभा सिंह पाटिल और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलेंगे। राजोआणा को 3१ मार्च को पटियाला की जेल में फांसी देने का डेथ वारंट जारी हो चुका है। बादल ने कहा कि सरकार इस मामले में कानूनेिह्लदों से राय ले रही है। बादल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सह आरोपी की याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। ऐसे में जब तक इन याचिकाओं का का निपटारा नहीं हो जाता फंासी की सजा को टाल देना चाहिए। बादल ने पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के परिवार का इस बात के लिए धन्यवाद किया जिसमें बेअंत सिंह के पोते ने कहा थी कानून व्यवस्था को देखते हुए राजोआणा की फांसी की सजा को उम्र कैद में बदल देना चाहिए। साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे कई मामलों में फांसी की सजा को स्थगित किया है जिनमें आरोपी ने अपील नहीं की है। बादल ने कहा कि इस मामले पर कांग्रेस पार्टी के मुखिया अमरिंदर सिंह ने भी सरकार का साथ देने की बात कही है। विधानसभा में राजोआणा को फंासी देने के मसले पर अकाली दल की सहयोगी पार्टी भाजपा ने मौन बनाए रखा।

कांग्रेस ने किया फांसी टालने का समर्थन
बेअंत सिंह की हत्या में दोषी बलवंत सिंह राजोआणा की फांसी के मामले में उस समय नया मोड़ आ गया, जब कांग्रेस ने भी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने का समर्थन किया। पार्टी अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि, बेअंत सिंह कांग्रेस से ही मुख्यमंत्री रहे हैं। कैप्टन ने कहा कि कानूनी मार्ग अपनाने या राष्ट्रपति को अपील करने संबंधी सरकार के फैसले का समर्थन किया जाएगा।
आनंदपुर साहिब से सासंद और बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि अकाल तख्त का फैसला मंजूर है। अकाल तख्त ने राजोआणा की सजा माफ करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने के आदेश दिए हैं। बिट्टू ने कहा कि पंजाब में शांति बनाए रखने के लिए सरकार जो भी फैसला लेगी, वह मंजूर होगा।